24 Mar 2026
जयपुर, 24 मार्च (हि.स.)। राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक मामले में आरोपित की गिरफ्तारी में कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं करने पर नाराजगी जताते हुए व्हाट्सएप पर नोटिस भेजने के बाद आरोपित को गिरफ्तार करने को अवैध ठहराया है। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल व्हाट्सएप के जरिए भेजा नोटिस कानूनी तौर पर सीआरपीसी की धारा 41-ए के तहत वैध नहीं है। वहीं ऐसे नोटिस के आधार पर की गई गिरफ्तारी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन है। इसके साथ ही अदालत ने इस मामले में एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ को अवमानना का दोषी ठहराते हुए उन्हें सजा के बिंदु पर 6 अप्रैल को पेश होने को कहा है। जस्टिस प्रवीर भटनागर ने यह आदेश आरएसएलडीसी में हुए घूसकांड से जुडे मामले में रवि मीणा की अवमानना याचिका पर दिया। अदालत ने कहा कि नोटिस की तामील कानून में निर्धारित प्रक्रिया यानि व्यक्तिगत तामील, चस्पा और स्पीड पोस्ट आदि से ही होनी चाहिए। यदि आरोपी नोटिस का पालन करता है, तो उसे बिना ठोस कारण गिरफ्तार नहीं करना चाहिए। याचिका में अधिवक्ता अधिवक्ता मोहित खंडेलवाल ने बताया कि मामले में एसीबी ने याचिकाकर्ता को एक फरवरी, 2023 को गिरफ्तार किया था। इससे पहले एसीबी के जांच अधिकारी ने 25 जनवरी, 2023 को उसे व्हाट्सएप के जरिए नोटिस भेजा और 31 जनवरी को पेश होने के लिए कहा। इस पर उसने एसीबी के नोटिस का जवाब देते हुए अपनी पत्नी की बीमारी के कारण समय मांगा था, लेकिन पुलिस ने बिना विधिक प्रक्रिया अपनाए ही उसे सीधे ही गिरफ्तार कर लिया। इसे चुनौती देते हुए कहा गया कि यह कार्रवाई सीआरपीसी की धारा 41 ए की अवहेलना है और मामले में कानूनी प्रक्रिया का अनुसरण नहीं किया है। इसके जवाब में एसीबी ने कहा कि उन्होंने आरोपी को नोटिस दिया था, लेकिन उसने जवाब में टालमटोल का रवैया रखा। इसके अलावा याचिकाकर्ता एफआईआर को रद्द करवाने के लिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जा चुके हैं और असफल रहे हैं। इसके बाद ही अनुसंधान एजेंसी पर दबाव बनाने के लिए उसने यह अवमानना याचिका दायर की है। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनकर एसीबी की गिरफ्तारी की कार्रवाई को गलत मानते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को तलब किया है।