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यूपी में तीन दिन की बारिश ने मचाई तबाही, 56 लोगों की मौत; 1,021 मकान क्षतिग्रस्त, 46 घायल

27 Sep 2026

लखनऊ, 27 सितंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। उत्तर प्रदेश में पिछले तीन दिनों से जारी भारी बारिश ने रविवार रात तक जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। लगातार बारिश, आंधी-तूफान और जलभराव से प्रदेश के अनेक जिलों में हालात बिगड़े हैं। 25 सितंबर की सुबह से 27 सितंबर की सुबह तक बारिश और तूफान से जुड़ी घटनाओं में 56 लोगों की मौत और 46 लोगों के घायल होने की सरकारी जानकारी सामने आई है। इस दौरान 107 पशुओं की भी मौत हुई और 1,021 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद के अनुसार, नुकसान का आकलन अभी जारी है और मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।

48 घंटे में सामान्य से 20 गुना से ज्यादा बारिश

बारिश की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 25 सितंबर की सुबह से 27 सितंबर की सुबह तक प्रदेश में 97.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जबकि इस अवधि का संचयी सामान्य औसत केवल 4.5 मिलीमीटर है। यानी बारिश सामान्य से करीब 22 गुना रही। प्रदेश के 75 में से 56 जिलों में अत्यधिक बारिश दर्ज की गई।

बीते 24 घंटे में कई स्थानों पर बेहद भारी बारिश हुई। फर्रुखाबाद के कैंपियरगंज में 320 मिमी, गोरखपुर के बर्डघाट में 234.2 मिमी, खीरी के धांगिनी में 195 मिमी, महाराजगंज के ट्रामोहानी घाट में 186 मिमी, गोरखपुर में 179.3 मिमी, मुरादाबाद के बिलारी में 180.2 मिमी, बरेली में 171.6 मिमी और आंवला में 168.2 मिमी बारिश दर्ज की गई।

सीतापुर में सर्वाधिक सात मौतें

सरकारी आंकड़ों के अनुसार सीतापुर में सात लोगों की मौत हुई है। लखीमपुर खीरी, बहराइच और बलरामपुर में पांच-पांच तथा अयोध्या और गोरखपुर में चार-चार लोगों की जान गई है। इसके अलावा बहराइच और कानपुर देहात में सात-सात तथा उन्नाव में छह मौतों की सूचना भी राहत संबंधी विस्तृत रिपोर्ट में दर्ज है।

घायलों में हरदोई में सात, जबकि मैनपुरी, श्रावस्ती और बाराबंकी में पांच-पांच तथा सीतापुर और लखीमपुर खीरी में तीन-तीन लोग शामिल हैं। पशुहानि में हरदोई सबसे आगे है, जहां 28 पशुओं की मौत की सूचना है।

एक हजार से ज्यादा मकान क्षतिग्रस्त

बारिश और आंधी से प्रदेश में 1,021 मकानों को नुकसान पहुंचा है। हरदोई में 272, सीतापुर में 108, चंदौली में 75, औरैया में 60, गोंडा में 54, हमीरपुर में 51, शाहजहांपुर में 47 और बहराइच में 44 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। खेतों में खड़ी धान, गन्ने और सब्जियों की फसलों को भी नुकसान पहुंचा है और फसल क्षति का विस्तृत आकलन कराया जा रहा है।

घाघरा-राप्ती उफान पर, निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा

बारिश कुछ क्षेत्रों में कम होने के बावजूद बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार घाघरा और राप्ती नदियों का जलस्तर कई निगरानी केंद्रों पर बढ़ रहा है। बाराबंकी के एल्गिनब्रिज में रविवार सुबह आठ बजे घाघरा का जलस्तर 106.14 मीटर दर्ज किया गया, जो उसके 106.07 मीटर के खतरे के निशान से ऊपर था। इससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है।

लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर समेत कई इलाकों में जलभराव से सड़क यातायात और सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। कई स्थानों पर लोगों को जलभराव वाले क्षेत्रों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने तत्काल राहत और मुआवजे के निर्देश दिए

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रभावित जिलों के अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने तथा जनहानि, पशुहानि और मकानों के नुकसान का मुआवजा तत्काल देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से फसल क्षति का आकलन कर प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराने को कहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि जिन परिवारों के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें जरूरत के अनुसार राहत केंद्रों और आश्रय स्थलों में तत्काल पहुंचाया जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि राहत कार्यों में किसी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद रहकर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करने और प्रभावित परिवारों से सीधे संपर्क बनाए रखने को कहा है। बारिश और आंधी की वजह से क्षतिग्रस्त विद्युत लाइनों को दुरुस्त कर यथाशीघ्र आपूर्ति बहाल करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

आगे भी बारिश की चेतावनी

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 27 सितंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बहुत भारी तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी जारी की थी। हालांकि रविवार को तीन दिन से बने मौसम तंत्र के कमजोर पड़ने से कुछ राहत मिली है, लेकिन तराई क्षेत्र में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना बनी हुई है।

आईएमडी के अनुसार, मध्य प्रदेश और उससे सटे उत्तरी छत्तीसगढ़ के ऊपर बने दबाव क्षेत्र के प्रभाव से मौसम में यह व्यापक बदलाव आया। 27 सितंबर के बाद मौसम तंत्र के कमजोर पड़ने की संभावना है, लेकिन नदियों के बढ़े जलस्तर और पहले से जलमग्न इलाकों के कारण बाढ़ का खतरा तत्काल खत्म नहीं माना जा सकता।

प्रदेश में राहत एवं बचाव दलों को जलभराव वाले क्षेत्रों में तैनात किया गया है। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक रूप से बाढ़ और जलभराव वाले क्षेत्रों में न जाने तथा तेज बहाव वाली नदियों, नालों और जलधाराओं से दूर रहने की अपील की है। आपात स्थिति में राहत आयुक्त कार्यालय की हेल्पलाइन 1070 पर संपर्क किया जा सकता है।

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