29 Sep 2026
नई दिल्ली, 29 सितंबर (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए 25 फीसदी कोटा लागू करने में उदासीन रवैया अपनाने पर मंगलवार को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की आलोचना की है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली बेंच ने आयोग के चेयरपर्सन और डायरेक्टर को सुनवाई की अगली तिथि पर सशरीर उपस्थित रहने का आदेश दिया है।
इससे पहले जनवरी में कोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए कई आदेश जारी किए थे। उस समय कोर्ट ने कहा था कि “पड़ोस के स्कूलों” की अवधारणा इसलिए बनाई गई, जिससे क्लास, जाति और लिंग की बाधाएं टूटें। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के लागू होने की निगरानी के लिए एनसीपीसीआर को एक पक्षकार के रूप में शामिल किया गया। हालांकि, इस मामले में पहले से ही एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) मौजूद है।
कोर्ट ने एनसीपीसीआर की तरफ से पेश हुई एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करवाने में एनसीपीसीआर की भूमिका महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने कहा कि एनसीपीसीआर के प्रमुख को यह समझना होगा कि कोर्ट ने उन पर कितना भरोसा जताया है इसलिए शिक्षा के अधिकार अधिनियम की रेगुलेटरी बॉडी के रूप में एनसीपीसीआर को इस कानून की धारा 12 के तहत तय उद्देश्यों और लक्ष्यों को हकीकत में बदलना होगा। बेंच ने कहा कि एनसीपीसीआर के प्रमुख को यह सुनिश्चित करना होगा कि आसपास का हर स्कूल इस अवधारणा को लागू करे।