29 Sep 2026
-उच्च न्यायालय ने यूपी पीसीएस व एपीओ भर्ती से जुड़े मामलों में फैसला सुरक्षित किया
-एपीओ-2025 की मुख्य परीक्षा तथा पीसीएस-2025 के अंतिम परिणाम जारी करने पर फैसला आने तक रोक
प्रयागराज, 29 सितंबर (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्ती प्रक्रियाओं में आरक्षण नियमों और मेधावी आरक्षित वर्ग के अनारक्षित श्रेणी में समायोजन (माइग्रेशन) को लेकर छिड़े कानूनी विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह निर्णय न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की पीठ ने यूपी पीसीएस-2024, पीसीएस-2025 और एपीओ-2025 से संबंधित याचिकाओं पर लंबी बहस के बाद दिया। इन परीक्षाओं को लेकर याची पंकज वर्मा व दो अन्य तथा संजय कुमार व तीन अन्य की तरफ से दाखिल की गई थी।
अदालत ने अंतिम फैसला आने तक अंतरिम आदेश जारी करते हुए आयोग को निर्देशित किया है कि वह यूपी एपीओ-2025 की मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित न करे। इसके साथ ही, यूपी पीसीएस-2025 के अंतिम चयन परिणाम जारी करने पर भी रोक लगा दी गई है। पीठ ने आयोग को स्पष्ट निर्देश दिया है कि जब तक इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं सुनाया जाता, तब तक इन परिणामों के प्रकाशन से पूरी तरह परहेज किया जाए।
पीसीएस-2024 मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे, एपीओ मामले में अधिवक्ता अनुराग त्रिपाठी तथा पीसीएस-2025 में अधिवक्ता अभिषेक शुक्ल ने पक्ष रखा। अधिवक्ताओं का मुख्य तर्क था कि जिन आरक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों ने बिना किसी छूट के सामान्य वर्ग के कटऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए हैं, उन्हें खुली मेरिट से बाहर रखना समानता के संवैधानिक अधिकार और स्थापित आरक्षण नियमों का उल्लंघन है।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने आयोग की कार्यप्रणाली और नियमों का बचाव करते हुए पक्ष रखा। राज्य सरकार का पक्ष शासन की ओर से अपर महाधिवक्ता/वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष गोयल ने रखा तथा इस मामले में विधिक स्थिति स्पष्ट की। पीसीएस-2024 के चयनित अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित सक्सेना ने पक्ष रखा। उल्लेखनीय है कि पूरा मामला उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994 की धारा 3(6) तथा आयोग के 9 जनवरी 2020 के कार्यालय ज्ञापन की कानूनी व्याख्या से जुड़ा है। अदालत में विस्तृत बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने सभी पक्षों से एक सप्ताह में लिखित बहस प्रस्तुत करने को कहा है।