23 Jun 2026
नई दिल्ली, 23 जून (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। यह निर्णय भारत के संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सलाह पर लिया गया। जॉर्ज कुरियन केरल बीजेपी के नेता हैं, उन्हें राज्य में हुए विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राज्यसभा में लाया गया था और 21 जून को जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त हो गया था। भाजपा ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि जॉर्ज कुरियन को दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा जाएगा। पार्टी ने उनकी जगह मध्य प्रदेश से भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया था। गौरतलब है कि 18 जून को हुए राज्यसभा चुनावों के लिए भाजपा ने दो केंद्रीय मंत्रियों—रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन—को पुनः उम्मीदवार नहीं बनाया था। 65 वर्षीय जॉर्ज कुरियन अगस्त 2024 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली तीसरी केंद्र सरकार में राज्य मंत्री (MoS) के रूप में कार्यरत थे। वे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और पार्टी की स्थापना के समय यानी 1980 से ही उससे जुड़े रहे हैं। मोदी सरकार में कुरियन मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री का दायित्व संभाल रहे थे। केंद्रीय मंत्रिपरिषद में वे ईसाई समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख चेहरों में से एक थे। जॉर्ज कुरियन मूल रूप से केरल के कोट्टायम से आते हैं और राज्य भाजपा इकाई के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। पेशे से वकील कुरियन टीवी बहसों में भाजपा का जाना-पहचाना चेहरा रहे हैं। केरल दौरे के दौरान उन्हें अक्सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भाषणों का मलयालम में अनुवाद करते हुए देखा गया है। साल 2024 में उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। राजनीतिक विश्लेषकों ने इस फैसले को केरल में भाजपा के विस्तार और विशेष रूप से ईसाई समुदाय के बीच पार्टी की स्वीकार्यता बढ़ाने की रणनीति के रूप में देखा था। दक्षिण भारत, खासकर केरल में भाजपा की सामाजिक और राजनीतिक पहुंच मजबूत करने में कुरियन की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती रही है।