27 Sep 2026
काठमांडू, 27 सितंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। नेपाल में पिछले कुछ दिनों से जारी लगातार भारी बारिश ने रविवार को व्यापक बाढ़ और भूस्खलन का रूप ले लिया। देश के कई हिस्सों में नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जबकि बाढ़ के पानी ने मकानों और बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया है। पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन से सड़क संपर्क बाधित हुआ है और कई स्थानों पर पुल तथा सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। प्रशासन और सुरक्षा बलों ने नदी किनारे तथा भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है।
सबसे गंभीर घटनाओं में से एक पश्चिमी नेपाल के पर्वत जिले में सामने आई है, जहां कालीगंडकी नदी के उफान में 25 मकान बह गए। जलजला ग्रामीण नगरपालिका-8 के फरसे इलाके में रविवार सुबह नदी का पानी बस्ती में घुस गया। पुलिस के अनुसार वहां करीब 80 मकान थे, जिनमें से 25 पूरी तरह बह गए हैं और बाकी मकानों पर भी खतरा बना हुआ है। राहत की बात यह है कि घटना से पहले बस्ती के लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया था और फिलहाल किसी जनहानि की सूचना नहीं है। भूस्खलन के कारण पुलिस दल भी तत्काल घटनास्थल तक नहीं पहुंच सका।
बुटवल में छह मकान बहे, करीब एक हजार लोगों को निकाला गया
रुपन्देही जिले के बुटवल में टिनाऊ नदी ने शनिवार रात खतरनाक रूप ले लिया। नदी के खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के बाद उसका पानी नदी किनारे बने छह मकानों को बहा ले गया। करीब 200 अन्य मकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है। सुरक्षा बलों ने रातभर अभियान चलाकर लगभग 1,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।
प्रशासन ने नदी और छोटी धाराओं के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने तथा जलस्तर बढ़ने की स्थिति में तत्काल सुरक्षित स्थानों पर चले जाने की अपील की है।
नारायणी और रिउ नदी भी खतरे के निशान से ऊपर
चितवन में नारायणी नदी और रिउ नदी रविवार सुबह खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गईं। देवघाट स्थित मापक केंद्र पर नारायणी का जलस्तर सुबह करीब 5:15 बजे 9.23 मीटर दर्ज किया गया, जबकि यहां चेतावनी स्तर 7.3 मीटर और खतरे का स्तर 9 मीटर है। रिउ नदी भी 3.92 मीटर तक पहुंच गई, जबकि उसका खतरे का स्तर 3.8 मीटर है।
नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के साथ ही निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने को कहा है।
निचले इलाकों में सैकड़ों घर डूबे, परिवारों का पलायन
इससे पहले नारायणी और सप्तकोशी नदियों में आई बाढ़ से नवलपरासी पश्चिम और सप्तरी जिलों में 389 मकान जलमग्न हो चुके हैं। नवलपरासी के सुस्ता इलाके में 172 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, जबकि सप्तरी में हनुमाननगर कंकालिनी नगरपालिका के 200 और तिलाठी कोइलाडी ग्रामीण नगरपालिका के 17 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है।
सुस्ता में कुछ स्थानों पर घरों के भीतर करीब तीन फुट तक पानी पहुंच गया है। बाढ़ से खेत और फसलें भी प्रभावित हुई हैं। स्थानीय लोगों के सामने एक ओर सुरक्षित स्थान पर जाने की चुनौती है तो दूसरी ओर मवेशियों और जमा अनाज को छोड़ने की चिंता बनी हुई है।
सड़क संपर्क पर भी बड़ा असर, कई राजमार्ग बाधित
लगातार बारिश और भूस्खलन ने नेपाल के सड़क नेटवर्क को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। चितवन में नारायणगढ़-मुग्लिन मार्ग सहित कई हिस्सों में भूस्खलन और मिट्टी खिसकने से यातायात बाधित हुआ है। कुछ स्थानों पर सड़कें पूरी तरह बंद हैं, जबकि कुछ हिस्सों में एक लेन से यातायात चलाया जा रहा है।
कर्णाली क्षेत्र में भी स्थिति चिंताजनक है। मुगु में भूस्खलन से नाग्ना-गमगढी सड़क अवरुद्ध है, जबकि कालिकोट में कर्णाली राजमार्ग पर मलबा आने से यातायात प्रभावित हुआ है। हुम्ला में कर्णाली कॉरिडोर के कई हिस्सों में भी भूस्खलन ने आवागमन मुश्किल कर दिया है।
नेपाल के प्रमुख राजमार्गों पर बारिश के कारण लगातार नए भूस्खलन सामने आने से प्रशासन के लिए सड़कें खोलना भी चुनौती बना हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि बारिश जारी रहने की स्थिति में मलबा हटाने के बाद भी नए भूस्खलन का खतरा बना रहता है।
पुल भी बाढ़ की चपेट में
स्यांगजा और गुल्मी को जोड़ने वाला मिर्मी का मोटरेबल पुल कालीगंडकी नदी के तेज बहाव में पूरी तरह बह गया। पुल के बह जाने से दोनों क्षेत्रों के बीच सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। भारी बारिश के कारण मिर्मी स्थित कालीगंडकी ‘ए’ जलविद्युत परियोजना के सभी गेट खोल दिए गए और बिजली उत्पादन रोकना पड़ा। स्यांगजा, पर्वत और गुल्मी के संगम पर स्थित सेतीवेणी बाजार में भी बाढ़ का पानी घुस गया।
बिजली और संचार व्यवस्था भी प्रभावित
भारी बारिश और पेड़ों के गिरने से कई जिलों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है। पाल्पा में 33 केवी की कई ट्रांसमिशन लाइनों पर असर पड़ा है। डडेलधुरा और सुर्खेत में भी पेड़ गिरने से बिजली लाइनों को नुकसान पहुंचा है। कुछ स्थानों पर सड़कें और उफनते नाले मरम्मत दलों की पहुंच में बाधा बन रहे हैं।
लगातार बारिश के कारण नेपाल के कुछ हिस्सों में मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। नेपाल टेलीकॉम ने बिजली आपूर्ति में व्यवधान और अन्य तकनीकी समस्याओं के कारण सेवा प्रभावित होने की जानकारी दी है।
पाल्पा में मकान भूस्खलन की चपेट में, तीन लापता
पाल्पा जिले में लगातार बारिश के बीच भूस्खलन से एक मकान के दब जाने की सूचना है। इस घटना में तीन लोगों के लापता होने की खबर है। राहत एवं बचाव दलों की ओर से तलाश जारी है।
वहीं, इससे पहले बागलुंग जिले में भूस्खलन से एक 69 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो चुकी है। उसका मकान मलबे में दब गया था।
प्रशासन हाई अलर्ट पर, नदियों के किनारे रहने वालों को चेतावनी
नेपाल के जल तथा मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार रविवार को भी देश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है और बाढ़ की निगरानी की जा रही है। विभाग की वेबसाइट पर वर्षा और नदी चेतावनी केंद्र सक्रिय हैं तथा आपातकालीन बाढ़ सूचना के लिए हेल्पलाइन 1155 उपलब्ध कराई गई है।
अधिकारियों ने नदी किनारे, निचले इलाकों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने तथा खतरा बढ़ने पर तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा है।
अगस्त की विनाशकारी बाढ़ के बाद नई चुनौती
नेपाल अभी अगस्त में आई विनाशकारी बाढ़ से पूरी तरह उबर भी नहीं पाया है और सितंबर की यह बारिश उसके सामने एक नई चुनौती बनकर आई है। अगस्त की आपदा में खासकर भोटेकोशी-त्रिशूली नदी तंत्र और हिमालयी सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी नुकसान हुआ था। इसलिए मौजूदा बारिश ने पहले से प्रभावित इलाकों में पुनर्वास और बुनियादी ढांचे की बहाली के काम को भी कठिन बना दिया है। हालांकि, अगस्त की आपदा के मृतक और लापता लोगों के आंकड़े मौजूदा बारिश से हुई क्षति के आंकड़ों से अलग हैं।
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता नदियों के बढ़ते जलस्तर, नए भूस्खलनों और लगातार बारिश के बीच निचले तथा नदी किनारे के इलाकों में रहने वाली आबादी की सुरक्षा को लेकर है। मौसम और जलस्तर की स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है तथा सुरक्षा बलों को बचाव एवं निकासी के लिए सक्रिय रखा गया है।