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हिमाचल विधानसभा में गूंजा संस्थानों के बंद और खोलने का मुद्दा, मुख्यमंत्री बोले- जरूरत के आधार पर ही खुलेंगे संस्थान

01 Sep 2026



शिमला, 01 सितंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान सरकारी संस्थानों को बंद करने और नए संस्थान खोलने का मुद्दा छाया रहा। इस दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच हल्की नोकझोंक भी हुई। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि सरकार संस्थानों को राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, जनता की जरूरत और आकलन के आधार पर खोल रही है। जहां संस्थानों की आवश्यकता नहीं है या पर्याप्त आधारभूत ढांचा और स्टाफ उपलब्ध नहीं है, वहां उनका युक्तिकरण किया जाएगा।


मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, विधायक रणधीर शर्मा और त्रिलोक जम्बाल के मूल सवाल के जवाब में बताया कि बीते तीन वर्षों में 31 जुलाई 2025 तक प्रदेश के विभिन्न विभागों के 2,035 संस्थान बंद किए गए, जबकि 362 नए संस्थान खोले गए। उन्होंने बताया कि बंद किए गए संस्थानों में से 123 को बाद में फिर से शुरू किया गया।


सुक्खू ने कहा कि संस्थानों को बंद करना सरकार का नीतिगत फैसला होता है और यह व्यक्तिगत स्तर पर नहीं लिया जाता। उन्होंने कहा कि सरकार ने संस्थानों की समीक्षा की तो कई शिक्षण संस्थानों में पर्याप्त शिक्षक और विद्यार्थी नहीं मिले। कुछ स्कूलों को पूर्व सरकार के कार्यकाल में प्राथमिक से उच्च स्तर तक बढ़ा दिया गया था, लेकिन संबंधित विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं थे। ऐसे संस्थानों को बंद करने के लिए सरकार ने पैरामीटर तय किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां संस्थान खोलने का औचित्य है, वहां सरकार जरूरत के आधार पर उन्हें खोलेगी। वहां कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी और आधारभूत ढांचा मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले बड़ी संख्या में संस्थान खोले थे। कई स्वास्थ्य संस्थान भी खोले गए, लेकिन वहां डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ उपलब्ध नहीं था।

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार गुणवत्ता, आधारभूत ढांचे और जनता की जरूरत को ध्यान में रखकर संस्थान खोल रही है। जहां आवश्यकता नहीं है, वहां युक्तिकरण किया जाएगा। सुक्खू ने बताया कि 31 जुलाई 2025 के बाद करीब आठ से दस नए संस्थान ही खोले गए हैं।


नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सवाल उठाया कि सरकार ने 2,035 संस्थान बंद किए, जबकि 362 खोले। इनमें 123 ऐसे हैं, जिन्हें बंद करने के बाद फिर शुरू किया गया। उन्होंने पूछा कि अगर ये संस्थान सही नहीं थे तो इन्हें दोबारा क्यों खोला गया। उन्होंने यह भी पूछा कि संस्थानों को बंद करने के लिए सरकार ने क्या मापदंड तय किए थे।


भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने पूरक सवाल में 31 जुलाई 2026 तक बंद और खोले गए संस्थानों की संख्या जाननी चाही। उन्होंने नैनादेवी क्षेत्र में जल शक्ति विभाग के डिविजन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां स्टाफ रखने के बाद डिविजन चलाया गया, लेकिन सरकार बदलने पर इसे बंद कर दिया गया। करीब तीन साल बाद कुछ किलोमीटर दूर इसे किराये के भवन में फिर खोला गया।


भाजपा विधायक बिक्रम ठाकुर ने पूछा कि सरकार के अनुसार ‘नीड बेस’ क्या है। उन्होंने जसवां-प्रागपुर में एसडीएम कार्यालय का मामला उठाते हुए कहा कि 15 अप्रैल 2026 को कार्यालय खोलने की घोषणा के बाद भी यह अभी तक क्रियाशील नहीं हुआ है। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है और हाईकोर्ट से सिफारिश मिलने के बाद एक-दो दिन में अधिसूचना जारी की जाएगी।


चुराह के विधायक हंसराज ने दूरदराज और कठिन भौगोलिक क्षेत्र का हवाला देते हुए चंबा जिला के चुराह में बिजली बोर्ड का डिविजन और दो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने की मांग की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चंबा जिले पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने चुराह का दौरा करने और जरूरत के अनुसार वहां डॉक्टर उपलब्ध कराने की बात कही।


इस दौरान जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री के जवाब पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जवाब में सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार पांच साल के लिए चुनी जाती है और उसे विकास के हित में फैसले लेने का अधिकार होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के अगले ही दिन यह कैसे तय हो गया कि भाजपा सरकार के समय खोले गए संस्थान जरूरत के आधार पर नहीं थे।


जयराम ठाकुर ने कहा कि 12 दिसंबर को कांग्रेस सरकार बनी और 13 दिसंबर को संस्थानों को बंद करने का फैसला लिया गया। उन्होंने सवाल किया कि एक दिन में बिना विस्तृत समीक्षा के यह कैसे तय कर लिया गया कि ये संस्थान जरूरत के आधार पर नहीं खोले गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कई संस्थान राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से बंद किए गए।


नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से पूछा कि भाजपा सरकार के समय खोले गए और जनता तथा जनप्रतिनिधियों की मांग पर शुरू किए गए संस्थानों की क्या फिर से समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में भाजपा की सरकार बनती है तो मौजूदा कांग्रेस सरकार के पांच साल के कार्यकाल में खोले गए संस्थानों की भी समीक्षा की जाएगी।


जयराम ठाकुर ने जनगणना का मुद्दा भी उठाया और कहा कि जनगणना प्रक्रिया पूरी होने तक संस्थानों को लेकर कुछ फैसलों पर रोक की स्थिति है। मुख्यमंत्री ने जवाब में कहा कि जनगणना के दौरान संस्थानों को खोलने को लेकर नियमों का पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनगणना पूरी होने के बाद नियमों के तहत संस्थानों की अधिसूचना जारी की जाएगी।



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