29 Sep 2026
नई दिल्ली, 29 सितंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज) । दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने दस वर्षीय बच्ची से रेप के मामले में मानवता की एक मिसाल पेश की है। रोहिणी कोर्ट के एडिशनल सेशंस जज रजनी रंगा ने इस मामले के फैसले में बच्ची के लिखे संदेश में कहा कि जिस व्यक्ति को उसने अंकल कहा था, अब वह आजाद होकर बाहर नहीं आएगा और अपनी बाकी जिंदगी जेल में बिताएगा। वहीं बूढ़ा होगा और वहीं उसकी जिंदगी खत्म हो जाएगी। अब दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया है कि रोहिणी कोर्ट के इस संदेश को प्रिंट कर बच्ची या उसक परिवार को सौंपा जाए। जस्टिस प्रतिभा सिंह की बेंच ने रोहिणी कोर्ट के संदेश को ‘message of courage’ यानि साहस के संदेश की संज्ञा दी। हाईकोर्ट ने दिल्ली जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को बच्ची के परिवार को साढ़े दस लाख का मुआवजा देने का भी आदेश दिया।
इस मामले में दोषी करार दिए गए आरोपी सुमित शाक्य ने रोहिणी कोर्ट के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रोहिणी कोर्ट की जज रजनी रंगा की कोर्ट में बच्ची के मासूम और दृढ़ बयान का विशेष रूप से संज्ञान लिया, जिसमें बच्ची ने कहा था, "जब तक 'अंकल' बूढ़े न हो जाएं, तब तक उन्हें जेल में ही रखा जाए।" रोहिणी कोर्ट ने अपने फैसले में नाबालिग के बयान को लिखा था, "बेटा, इस अदालत ने तुम्हारी बात सुनी। तुमने जो कहा था, उसका जवाब इस अदालत ने दे दिया है। आज इस अदालत ने आदेश दिया है कि जिस शख्स को तुम 'अंकल' कहती थीं, वह अब कभी खुली हवा में सांस नहीं ले पाएगा। वह अपनी बाकी की जिंदगी एक पिंजरे में बिताएगा, उसी पिंजरे में बूढ़ा होगा और उसी में उसकी मौत होगी। वह अब कभी तुम्हें, तुम्हारी छोटी बहन या किसी अन्य बच्चे को नुकसान नहीं पहुंचा सकेगा।"
रोहिणी कोर्ट ने बच्ची की बहादुरी की सराहना करते हुए आगे कहा, "तुम इस अदालत द्वारा देखी गई अब तक की सबसे बहादुर बच्ची हो। तुमने अदालत में आकर उस शख्स की तरफ इशारा किया जिसने तुम्हें तकलीफ दी और सच बोला। तुमने चुप रहने की बजाय अपनी मां को सब बताया। तुम्हारी इसी हिम्मत के कारण अब वहशी दरिंदा कभी किसी दूसरे बच्चे को चोट नहीं पहुंचा पाएगा।"
रोहिणी कोर्ट ने बच्ची को संबोधित करते हुए कहा, "बेटा, अब अपनी जिंदगी जियो, स्कूल जाओ और सपने देखो।" कोर्ट ने कहा कि न्याय और सजा भले ही मिल गई हो लेकिन व्यवस्था इस बच्ची के बचपन के उस भयानक दौर को नहीं लौटा सकती। इसके बावजूद, अदालत ने अपने संदेश के अंत में बच्ची को जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देते हुए बेहद भावुक शब्द कहे, "यह अदालत तुम्हारा बचपन तो वापस नहीं ला सकती लेकिन यह वादा जरूर करती है कि तुम्हारी बात सुनी गई है। अब बेटा, अपनी जिंदगी जियो। स्कूल जाओ, दोस्त बनाओ, हंसो, खेलो और सपने देखो। यह अदालत तुम्हारी इस हिम्मत को हमेशा याद रखेगी।"
घटना 23 जुलाई 2023 की है जब बच्ची सात साल की थी। रोहिणी के बुध विहार थाना के क्षेत्राधिकार में ये घटना हुई। रोहिणी कोर्ट ने मई , 2026 में आरोपी को दोषी करार दिया था। रोहिणी कोर्ट के फैसले को आरोपी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी लेकिन हाईकोर्ट ने रोहिणी कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।