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छत्तीसगढ़ के तीन जांबाज जवान देश के प्रतिष्ठित वीरता सम्मान शौर्य चक्र से सम्मानित

08 Jun 2026


रायपुर, 08 जून (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। छत्तीसगढ़ के लिए आज गर्व का बड़ा दिन है। राज्य के तीन जांबाज जवानों को नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों देश के प्रतिष्ठित वीरता सम्मान शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। इनमें छत्तीसगढ़ के बालोद निवासी असम राइफल्स के जवान भोजराम साहू, छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के दो जांबाज पुलिस अधिकारियों, इंस्पेक्टर लक्ष्मण केवट ,इंस्पेक्टर रामेश्वर प्रसाद देशमुख और बालोद के रहने वाले असम राइफल्स के जवान भोजराम साहू शामिल हैं।

बालोद जिले के डौंडी इलाके के छोटे से गांव ढोर्रीठेमा के रहने वाले भोजराम साहू की कहानी रोंगटे खड़े कर देने वाली है। बात 15 नवंबर 2024 की है। मणिपुर के टेंगनोपाल में कुछ आतंकियों के छिपे होने की खबर मिली। भोजराम अपनी टीम के साथ मोर्चे पर डट गए। सुबह करीब साढ़े नौ बजे अचानक ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई। इस बीच एक गोली सीधे आकर भोजराम को लगी। घाव गहरा था, खून बह रहा था, लेकिन इस जवान का हौसला नहीं डिगा। भोजराम ने घायल होने के बाद भी ट्रिगर से उंगली नहीं हटाई और लगातार गोलियां बरसाते रहे। नतीजा यह हुआ कि आतंकियों को मैदान छोड़कर भागना पड़ा। इस मुठभेड़ में हमारी सेना ने 3 खतरनाक आतंकियों को ढेर कर दिया था।


बस्तर और राजनांदगांव के बीहड़ों में नक्सल विरोधी अभियान की जब भी बात आती है। लक्ष्मण केवट और रामेश्वर देशमुख का नाम सबसे पहले आता है। इन दोनों अफसरों को महकमे में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट कहा जाता है। लक्ष्मण केवट अब तक 97 और रामेश्वर देशमुख 56 नक्सली ऑपरेशनों को लीड कर चुके हैं।


इनकी बहादुरी की सबसे बड़ी मिसाल 16 अप्रैल 2024 को कांकेर के हापाटोला जंगल में दिखी। यहां इन दोनों भाइयों की जोड़ी ने खुद आगे रहकर कमान संभाली और एक ही ढेरे में 15 महिला नक्सलियों समेत कुल 29 नक्सलियों का सफाया कर दिया। छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा और सफल ऑपरेशन माना जाता है।अप्रैल 2024 में लोकसभा चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने के इरादे से भारी संख्या में शीर्ष नक्सलियों के हापाटोला के जंगलों में जुटने की सटीक जानकारी मिली थी। डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड और सीमा सुरक्षा बल की संयुक्त टीम ने रणनीतिक रूप से पहाड़ी पर नक्सलियों की तगड़ी घेराबंदी की। नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी ब्लास्ट और अंधाधुंध गोलीबारी का जवाब देते हुए जवानों ने कड़ा मुकाबला किया।


साढ़े पांच घंटे तक चले इस भीषण युद्ध में सुरक्षा बलों ने बिना किसी बड़े नुकसान के 29 माओवादियों के शव और मौके से भारी मात्रा में एके-47, एसएलआर, इंसास राइफल और लाइट मशीन गन जैसे खतरनाक हथियार बरामद किए थे।यह प्रतिष्ठित सम्मान न सिर्फ कांकेर पुलिस बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ पुलिस बल के लिए बेहद गौरव का दिन है, जो बस्तर क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बहाल करने की दिशा में उनके अटूट संकल्प को दर्शाता है।


यह पहली बार नहीं है जब इन दोनों अफसरों का डंका दिल्ली में बजा हो। लक्ष्मण केवट को इससे पहले भी 6 बार राष्ट्रपति पुलिस पदक मिल चुका है। वहीं रामेश्वर देशमुख को भी दो बार राष्ट्रपति सम्मानित कर चुके हैं। अब इनके कंधों पर शौर्य चक्र का तमगा सजेगा। फिलहाल लक्ष्मण केवट पाखंजूर में तैनात हैं और रामेश्वर देशमुख भानुप्रतापपुर के थाना प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।


कांकेर के पुलिस अधीक्षक निखिल आकाश राखेचा ने इस मौके पर खुशी जताते हुए कहा यह सिर्फ कांकेर पुलिस के लिए नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए बेहद गर्व की बात है। हमारे दो जांबाज अफसरों को महामहिम राष्ट्रपति सम्मानित कर रही हैं। मुश्किल इलाकों में काम करने वाले दूसरे जवानों के लिए यह एक बड़ी प्रेरणा बनेगा।


इस सम्मान पर खुद लक्ष्मण केवट का कहना है कि हम चाहते हैं कि बस्तर के अंदरूनी गांवों में शांति लौटे और लोगों के दिलों में पुलिस व कानून के प्रति भरोसा जागे।