23 Sep 2026
नई दिल्ली, 23 सितंबर (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर की जिला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय की ओर से जुर्माना लगाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया है। उच्च न्यायालय ने दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक छात्रा की रासुका के तहत की गई कथित गैरकानूनी गिरफ्तारी से जुड़े मामले में मेधा रुपम की सैलरी से 5 लाख रुपये का मुआवजा वसूलने का निर्देश दिया था। जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने फैसला सुरक्षित रखने का आदेश दिया।
अप्रैल में नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान आकृति चौधरी को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। ये प्रदर्शन मजदूरों के अधिकारों और वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर हुआ था। बाद में जिला प्रशासन ने आकृति पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए रासुका लगा दिया था। आकृति ने इस कार्रवाई के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय ने कहा था कि आकृति की तरफ से हिंसा के लिए लोगों को उकसाने के ठोस सबूत नहीं हैं। उच्च न्यायालय ने कहा था कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करना और अपनी बात रखना संविधान से मिला अधिकार है।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आकृति की हिरासत को रद्द करते हुए गौतमबुद्ध नगर जिला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम पर सख्त टिप्पणी की थी। उच्च न्यायालय ने हिरासत को मनमाना बताते हुए मेधा रूपम और दूसरे अधिकारियों के वेतन से आकृति को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। उच्च न्यायालय ने कहा था कि ये रकम डीएम और दूसरे जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन से वसूली जाए।