30 Mar 2026
नई दिल्ली, 30 मार्च (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय के जस्टिस तुषार राव गडेला की बेंच ने कथावाचक अनिरुद्धाचार्य के व्यक्तित्व के अधिकारों के संरक्षण का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि अनिरुद्धाचार्य की सहमति के बिना किसी भी कंटेंट का इस्तेमाल नहीं किया जाए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आलोचना का अधिकार सभी को है। कोर्ट ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने कभी मानहानि का केस नहीं किया। वे वाद-विवाद से ही लोगों को गलत साबित करते थे। कोर्ट ने कहा कि आप आलोचना, प्रशंसा, इच्छा हर चीज से ऊपर हैं। आपको इन सबसे ऊपर माना जाता है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आप एक दर्शन का पक्ष रखते हैं और कोई न कोई आपसे असहमति जताने वाला भी होगा। सुनवाई के दौरान अनिरुद्धाचार्य के वकील ने कहा कि उनके नाम और फोटो का प्रयोग सट्टा और गेमिंग चलाने वाले ऐप में दिया जा रहा है। एआई की मदद से कुछ ऐसे कंटेंट ऐसे दिखाएं जा रहे हैं जिसके मुताबिक सब कुछ अनिरुद्धाचार्य ही कर रहे हैं। इसके पहले उच्च न्यायालय ने मलयालम फिल्म अभिनेता मोहनलाल, भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच और पूर्व सांसद गौतम गंभीर, पतंजलि आयुर्वेद के आचार्य बालकृष्ण, फिल्म अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा, बाबा रामदेव, फिल्म अभिनेत्री काजोल फिल्म अभिनेता विवेक ओबेरॉय, आंध्रप्रदेश के उप-मुख्यमंत्री पवन कल्याण, पूर्व क्रिकेटर सुनील गावस्कर, फिल्म अभिनेता सलमान खान, अभिनेता अजय देवगन, अभिनेत्री और सांसद जया बच्चन, पत्रकार सुधीर चौधरी, आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर, तेलुगु अभिनेता नागार्जुन, अभिनेत्री ऐश्वर्या राय, अभिषेक बच्चन और फिल्म प्रोड्यूसर करण जौहर के व्यक्तित्व से जुड़ी किसी बात का बिना अनुमति इस्तेमाल नहीं करने का आदेश दिया था।