02 Jun 2026
-विवेक शुक्ला भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर 27 मई को सुबह उनकी समाधि शांतिवन में सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। इससे पहले ही वहां विभिन्न धर्मों के धर्मगुरु, विद्वान और श्रद्धालु वहां पहुंचने लगे थे। इनमें अधिकांश वे चेहरे थे जो गांधी समाधि राजघाट पर 2 अक्टूबर और 30 जनवरी को भी नियमित रूप से दिखाई देते हैं। ये सभी अपने-अपने धर्मो की पवित्र पुस्तकों से प्रार्थना के दौरान पाठ करते हैं। गत दो-ढाई दशकों से शांतिवन और राजघाट पर बाइबिल का पाठ करने वाले जॉर्ज सोलोमन तुर्कमान गेट स्थित ट्रिनिटी चर्च में पादरी हैं। वे दिल्ली और हरियाणा के सोनीपत में सेंट स्टीफंस कैंब्रिज स्कूल की प्रबंधन समिति से भी जुड़े हैं। वे कहते हैं, “भारत में सरकारी स्तर पर सर्वधर्म प्रार्थना का आयोजन इस बात का प्रमाण है कि यह देश सबका है। बाइबिल भी प्रेम और भाईचारे का संदेश देती है।” ये चेहरे वास्तव में भारत की आत्मा हैं, जहां विविधता में एकता जीवित है। सर्वधर्म प्रार्थना सभाएं हमें बार-बार याद दिलाती हैं कि गांधीजी का सपनों का भारत सबका है, जिसमें हर धर्म को सम्मान मिलता है। मकसूद अहमद शांतिवन और राजघाट पर कुरान की आयतें पढ़ते हैं। वे पूर्व राष्ट्रपतियों के.आर. नारायणन, प्रणव मुखर्जी तथा प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर आयोजित सर्वधर्म प्रार्थना सभाओं में भी शामिल हो चुके हैं। एंग्लो अरबी स्कूल में जीव विज्ञान के शिक्षक मकसूद अहमद कहते हैं कि कुछ दिमागी रूप से असंतुलित लोग इन सभाओं की भी आलोचना करने लगे हैं। डॉ. बलदेव आनंद सागर 2 अक्टूबर और 30 जनवरी की विशेष तिथियों पर सर्वधर्म प्रार्थना में गीता पाठ करते हैं। वे बताते हैं कि पहली बार राजघाट पर इस सभा का हिस्सा बनने पर जो अनुपम अनुभूति हुई, वह आज भी उनके मन में ताज़ा है। राजघाट पर वे गीता के 5-6 श्लोक पढ़ते हैं, जबकि 30 जनवरी मार्ग पर पंचदेव-सूर्य, गणेश, दुर्गा, शिव और विष्णु-की प्रार्थना का पाठ करते हैं। वे मानते हैं कि सनातन परंपरा में इन सभी देवताओं की पूजा अनिवार्य है। सर्वधर्म प्रार्थना का सुंदर विचार महात्मा गांधी ने विश्व को दिया था। उनके जीवनकाल में ही इसकी शुरुआत हुई और आज भी यह परंपरा पूरे जीवंत रूप में मौजूद है। इन सभाओं में बहाई, यहूदी, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों के पवित्र ग्रंथों का भी पाठ किया जाता है। सर्वधर्म प्रार्थना का विचार अत्यंत व्यापक और महत्त्वपूर्ण है। यह संदेश देता है कि भारत में अलग-अलग धर्मों को मानने वाले लोग एक साथ बैठकर अपने धर्मग्रंथों के मुख्य संदेशों को साझा कर सकते हैं। इन सभाओं में भाग लेने वालों को 5100 रुपए का मानदेय मिलता है। जॉर्ज सोलोमन विभिन्न स्थानों पर आयोजित सर्वधर्म प्रार्थनाओं में बाइबिल का पाठ करते हैं। वे कहते हैं कि नरेन्द्र मोदी की सरकार भारत में सबके साथ समान व्यवहार करती है। सरकारी आयोजनों में इन सभाओं का होना भारत सरकार के समान धार्मिक रवैये का प्रमाण है। बाइबिल सहित सभी धर्मग्रंथ प्रेम और भाईचारे का संदेश देते हैं। गांधीजी को दक्षिण अफ्रीका में बाइबिल और ईसाई धर्म को गहराई से समझने का अवसर मिला था। 85 वर्षीय कात्सू सान भारत सरकार द्वारा आयोजित प्रार्थना सभाओं के अलावा 2 अक्टूबर और 30 जनवरी को राजघाट तथा 30 जनवरी मार्ग (बिड़ला हाउस) पर आयोजित सर्वधर्म प्रार्थना सभाओं की स्थायी उपस्थिति हैं। उन्होंने डॉ. शंकर दयाल शर्मा, के.आर. नारायणन, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, प्रणव मुखर्जी, रामनाथ कोविंद जैसे राष्ट्रपतियों तथा इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी के समक्ष बौद्ध धर्मग्रंथों से प्रार्थना पढ़ी है। संसद के नये भवन के भूमिपूजन के समय भी सर्वधर्म प्रार्थना सभा आयोजित की गई थी। इन सभाओं में प्रत्येक धर्म के प्रतिनिधि को 5-6 मिनट का समय दिया जाता है। धर्मनिरपेक्षता का अर्थ यह कदापि नहीं है कि कोई देश अपनी धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक आस्थाओं को त्याग दे। यह असंभव भी है। भारत के संविधान की मूल प्रति में अर्जुन को गीता का उपदेश देते श्रीकृष्ण की तस्वीर है। भगवान बुद्ध शांति का उपदेश देते दिखते हैं। हिंदू धर्म के प्रतीक शतदल कमल, राम, कृष्ण, नटराज के चित्र भी वहाँ मौजूद हैं। यदि आज ये चित्र लगाए जाते तो कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी इन्हें सांप्रदायिक बताकर विरोध करते। संविधान की मूल प्रति पर मुगल बादशाह अकबर, सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह, मैसूर के सुल्तान टीपू सुल्तान और 1857 की वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के चित्र भी हैं। इससे स्पष्ट है कि भारत के लिए धर्मनिरपेक्षता के अर्थ बहुत गहरे हैं। बिना मतलब विवाद खड़े करने वालों को इसे समझना चाहिए। सर्वधर्म प्रार्थना सभाएँ भारत की साझा संस्कृति और समावेशी लोकतंत्र की सुंदर अभिव्यक्ति हैं। ये हमें याद दिलाती रहेंगी कि विविधता हमारी ताकत है और एकता हमारा संकल्प। (लेखक, वरिष्ठ पत्रकार और जाने-माने स्तंभकार हैं।)