16 Jan 2026
नई दिल्ली, 16 जनवरी (हि.स.)। ठंड में बेघरों को शेल्टर होम उपलब्ध कराने के मामले पर दिल्ली उच्च न्यायालय के संज्ञान लेने के बाद दिल्ली में 70 पैगोडा टेंट स्थापित किए गए हैं। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने शुक्रवार काे चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय को सूचित किया कि प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज के साथ हुई बैठक के बाद 70 पैगोडा टेंट स्थापित किए गए हैं और सभी सब-वे को अपने हाथ में लेकर सफाई की गई है। शर्मा ने कहा कि पिछले दो दिनों में ये सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है कि कोई भी बेघर व्यक्ति ठंड में खुले में न रहे। सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने 15 जनवरी को हुई बैठक और उसके बाद टेंट स्थापित करने से लेकर सबवे को हाथ में लेने की कार्रवाई पर संतोष जताया। सुनवाई के दौरान जब एम्स अस्पताल की ओर से बताया गया कि वो दो एकड़ भूमि में तीन हजार बेडों वाला विश्राम सदन स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है। तब कोर्ट ने एम्स के वकील से पूछा कि क्या एम्स दान लेता है, तब एम्स के वकील ने कहा कि हां। उसके बाद कोर्ट ने चेतन शर्मा से कहा कि आप दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के सदस्यों से उदारतापूर्वक दान देने को कहिए। इसके बाद दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील एन. हरिहरन वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये कोर्ट में पेश हुए और उन्होंने कहा कि जिस तरह पंजाब में बाढ़ के वक्त दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के सदस्य वकीलों ने मदद की थी, वैसे ही वे एम्स के विश्राम सदन के लिए दान करेंगे। इस पर चेतन शर्मा ने कहा कि सबसे पहले वे इसमें व्यक्तिगत रुप से दान देंगे। इससे पहले 14 जनवरी को उच्च न्यायालय ने कहा था कि भारत एक सामाजिक कल्याण वाला देश है और लोगों को शेल्टर के अधिकार से वंचित करना जीवन के अधिकार से वंचित करने जैसा है। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय ने कहा था कि बेघर लोगों को शेल्टर देने के अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से सरकार पल्ला नहीं झाड़ सकती हैं। उच्च न्यायालय ने दिल्ली में पड़ रही कड़ाके की ठंड के बीच एम्स और दूसरे अस्पतालों के बाहर मरीजाें और उनके तीमारदारों की खुले आसमान के नीचे रात गुजारने के मामले पर सुनवाई के दौरान ये टिप्पणी की थी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले पर कई दिशा-निर्देश जारी किए थे। कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम, नई दिल्ली नगर पालिका परिषद, दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन, पीडब्ल्यूडी, डीडीए, दिल्ली जल बोर्ड और दिल्ली पुलिस आयुक्त के अलावा दिल्ली के सभी बड़े अस्पतालों को पक्षकार बनाने का आदेश दिया था। उच्च न्यायालय ने एम्स के अलावा सफदरजंग अस्पताल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और राम मनोहर लोहिया अस्पताल को भी पक्षकार बनाने का निर्देश दिया था। उच्च न्यायालय ने दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को निर्देश दिया था कि वो अस्पतालों के आसपास के सबवे को अपने हाथों में ले और वहां पर्याप्त शेल्टर होम्स स्थापित करे। बोर्ड अस्पतालों के नजदीक खाली स्थानों की पहचान करे और वहां टेंट या पंडाल स्थापित करेगा। इसमें सभी प्राधिकार सहयोग करें. अगर कोई अधिकारी इसमें सहयोग नहीं करेगा को उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उच्च न्यायालय ने साकेत कोर्ट के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज की अध्यक्षता में बैठक करने का आदेश दिया था, जिसके बाद 15 जनवरी को बैठक हुई थी औऱ सभी संबंधित प्राधिकारों के अधिकारी मौजूद थे। उच्च न्यायालय ने 12 जनवरी को इस मामले पर स्वत: संज्ञान लिया था। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। उच्च न्यायालय ने कहा था कि ईश्वर न करें, लेकिन हमें कभी ऐसे खुले आसमान के नीचे रात गुजरानी पड़े तो हम पर न जाने क्या बीतेगी। सरकारी महकमे को इसे लेकर और ज़्यादा संवेदनशील होने की जरूरत है। उच्च न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि वो राजधानी के शेल्टर होम में पर्याप्त जगह और सुविधाएं उपलब्ध कराए।