24 Jul 2026
नई दिल्ली, 24 जुलाई (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों और छात्रों के साथ हुए कथित व्यवहार को लेकर तीखी आलोचना की है। एक अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित अपने लेख "शिक्षा व्यवस्था का पतन और युवा भारत की त्रासदी" में उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने, परीक्षा प्रणाली में अव्यवस्था, बढ़ते निजीकरण और छात्रों के आंदोलनों के प्रति दमनात्मक रवैये ने युवाओं में व्यापक असंतोष पैदा किया है।
सोनिया गांधी ने कहा कि हाल के सप्ताहों में प्रश्नपत्र लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर विभिन्न स्थानों पर छात्रों ने प्रदर्शन किए। उनका आरोप है कि इन प्रदर्शनों के दौरान 20 जुलाई को दिल्ली में पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज तथा आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिससे कई छात्र घायल हुए। उन्होंने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतिकूल बताया और सरकार पर संवाद के बजाय बल प्रयोग का रास्ता अपनाने का आरोप लगाया।
लेख में उन्होंने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में देशभर में 152 प्रश्नपत्र लीक हुए हैं। उनका आरोप है कि सार्वजनिक शिक्षा पर सरकारी व्यय में कमी, सरकारी स्कूलों के बंद होने, उच्च शिक्षा संस्थानों पर वित्तीय दबाव और बढ़ती फीस के कारण छात्रों तथा उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी पर परिवारों का बढ़ता खर्च शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों को दर्शाता है।
सोनिया गांधी ने National Testing Agency (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली के अत्यधिक केंद्रीकरण और संसाधनों की कमी के कारण पारदर्शिता और विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं में बेरोजगारी, उच्च शिक्षा संस्थानों में नियुक्तियों और पाठ्यक्रमों से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार को जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।
उन्होंने National Education Policy 2020 (राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020) के क्रियान्वयन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि इसे पर्याप्त संसदीय चर्चा और व्यापक सहमति के बिना लागू किया गया। साथ ही, उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
कांग्रेस नेता ने कहा कि छात्रों का आंदोलन शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और जवाबदेही से जुड़े मुद्दों का परिणाम है तथा सरकार को इन विषयों पर संवाद के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए।
केंद्र सरकार ने समय-समय पर शिक्षा क्षेत्र में सुधार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और युवाओं के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम करने का दावा किया है। वहीं, प्रश्नपत्र लीक और अन्य अनियमितताओं के मामलों में सरकार ने जांच तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की बात भी कही है। इन मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं।