23 Jun 2026
लखनऊ, 23 जून (एजेंसी.)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके की एक इमारत में लगी आग से हुई जनहानि के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ताबड़तोड़ एक्शन के मूड में दिख रही है। इस प्रकरण में व्यावसायिक इमारत के मालिक सहित समेत चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर उनको गिरफ्तार किया गया है। इसके साथ ही नगर निगम के दो और ऊर्जा विभाग व फायर के एक-एक अधिकारियों को निलंबित किया गया है।
अलीगंज पुलिस की ओर से देर रात को इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद अलीगंज सेक्टर डी निवासी रामकृष्ण उपाध्याय, सीतापुर रोड निवासी वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, ठाकुरगंज का रहने वाला तूशॉक कृष्णा जयसवाल और मड़ियाव के केशवनगर निवासी सुरेश कुमार साहू को गिरफ्तार किया है। इधर, मुख्यमंत्री के निर्देश पर बिजली विभाग के जानकीपुरम एक्सेन कलेक्शन गौरव कुमार, एफएसएसओ फायर विभाग इंदिरानगर के प्रभारी कमलेन्द्र कुमार सिंह, लखनऊ विकास प्राधिकरण के ऐई अनिल कुमार और जेई प्रमोद पांडे को सस्पेंड ंकर दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने पाँच कालीदास मार्ग स्थित अपने आवास पर हाईलेवल मीटिंग आयोजित की जिसमें सभी बड़े और प्रमुख अफसर शामिल हुए। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अमृत अभिजात, अपर मुख्य सचिव, पर्यटन, धर्मार्थ और संस्कृति विभाग व प्रवीण कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक लखनऊ जोन के नेतृत्व में दो सदस्यीय विशेष जांच दल के गठन का निर्देश दिया। विशेष जांच दल को सात दिनों के अंदर अपनी जांच पूरी करके मुख्यमंत्री को सौंपना है। जांच के दायरे में कई बड़े अफसरों के आने की आशंका है। वहीं, एलडीए वीसी ने जांच के लिए टीम गठित की है।
2016 में निरस्त किया गया था बिल्डिंग के खिलाफ ध्वस्तीकरण का आदेश
अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब भवन से जुड़े पुराने दस्तावेज और प्राधिकरण की कार्रवाई गंभीर सवालों के घेरे में हैं। सोमवार को जिस भवन में आग लगने की यह दुःखद घटना हुई, उसके खिलाफ वर्ष 2016 में अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था, लेकिन दो माह से कम समय में ही उस आदेश को निरस्त भी कर दिया गया।
1980 में हुआ था आवंटन
अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित भवन संख्या एमएस102डी मूल रूप से 11 जुलाई 1980 को लॉटरी प्रणाली के तहत विजय कुमार को किराया-क्रय पद्धति पर आवंटित किया गया था। 4 नवंबर 1980 को अनुबंध निष्पादित होने के बाद भवन का कब्जा आवंटी को सौंप दिया गया। 2005 में यह भवन विक्रय विलेख के जरिए विजय कुमार और उनकी पत्नी उषा के नाम दर्ज हुआ। वहीं 19 जनवरी 2013 को इन लोगों ने यह भवन वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला और सुरेन्द्र प्रताप शुक्ला के नाम बेच दिया। 7 अगस्त 2014 को लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वीरेन्द्र व सुरेन्द्र के पक्ष में नामांतरण की प्रक्रिया पूरी की। करीब 1992 वर्गफीट क्षेत्रफल वाले इस भवन का मानचित्र 20 अगस्त 2014 को स्वतः मानचित्र योजना के तहत आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था।
ध्वस्तीकरण आदेश निरस्त होने पर उठे सवाल
हालांकि, बाद में भवन में अनधिकृत निर्माण की बात सामने आई। इसके बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला के खिलाफ मुकदमा संख्या-082016 दर्ज कराया। जांच के बाद विहित प्राधिकारी ने 10 मई 2016 को अनधिकृत निर्माण के विरुद्ध ध्वस्तीकरण आदेश पारित कर दिया। लेकिन, ध्वस्तीकरण आदेश जारी होने के दो माह के अंदर ही 5 जुलाई 2016 को इस आदेश को निरस्त
भी कर दिया गया।