17 Feb 2026
नई दिल्ली, 17 फ़रवरी (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव की जमानत रद्द करने की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की मांग पर सुनवाई करते हुए कहा कि इस मामले के आरोपित साठ वर्ष से ऊपर के हैं। जस्टिस एमएम सुंदरेश की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये टिप्पणी की। सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश एएसजी एसवी राजू ने कहा कि उच्च न्यायालय ने लालू प्रसाद यादव की सजा को निलंबित कर कानून का गलत इस्तेमाल किया है। ये आदेश गैरकानूनी है। सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि इस मामले में कई आरोपित हैं और कुछ ने अभी तक सीबीआई की याचिका का जवाब नहीं दिया है। कुछ को तो कोर्ट का समन भी नहीं मिला है। तब कोर्ट ने कहा कि हम जानते हैं कि ये याचिका क्या है। हम ये समझते हैं कि सीबीआई और लालू प्रसाद यादव के वकील इसका परिणाम जानते हैं। आप अपना काम कीजिए और हम अपना काम कर रहे हैं। लालू प्रसाद यादव ने अपने जवाब में सीबीआई की याचिका का विरोध करते हुए कहा है कि केवल इस आधार पर कि सीबीआई इस फैसले से असंतुष्ट है और उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती नहीं दी जा सकती है। लालू ने अपने जवाब में कहा है कि उच्च न्यायालय का फैसला सामान्य सिद्धांतों और नियमों पर आधारित है। ऐसे में इस आदेश में हस्तक्षेप की कोई जरुरत नहीं है। लालू ने कहा है कि खराब स्वास्थ्य और बढ़ती उम्र की वजह से उन्हें हिरासत में रखने से सीबीआई का कोई मकसद पूरा नहीं होगा। सीबीआई ने लालू को झारखंड के डोरंडा कोषागार के चारा घोटाला मामले में झारखंड उच्च न्यायालय से मिली जमानत को चुनौती दी है। डोरंडा कोषागार से जुड़े चारा घोटाला मामले में लालू यादव को पांच साल की सजा और 60 लाख रुपये का जुर्माना भी लगा था। इस मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने 22 अप्रैल, 2022 को लालू यादव को जमानत दे दी थी। उच्च न्यायालय ने लालू यादव के खराब स्वास्थ्य को देखते हुए जमानत दी थी। उच्च न्यायालय के आदेश को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। लालू कुल चार मुकदमों में सजायाफ्ता हैं।