04 Jul 2026
-हत्या को 15 साल व्यतीत हो जाने के बावज़ूद वारिसान को नहीं मिले पेंशन परिलाभ जोधपुर, 04 जुलाई (एजेंसी)। राजस्थान हाईकोर्ट में एएनएम भंवरी देवी की हत्या हुए को 15 साल व्यतीत हो जाने के बावज़ूद वारिसान को पेंशन परिलाभ नहीं दिये जाने को लेकर अवमानना याचिका दायर हुई है। आदेश हुए ढ़ाई साल बीत जाने के बावजूद भी भंवरी देवी के वारिसान को पेंशन परिलाभ जारी नहीं करने पर हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि या तो 18 जुलाई तक आदेश की पालना कर दें, अन्यथा अप्रार्थी चिकित्सा सचिव गायत्री राठौड़, जोधपुर सीएमएचओ डॉ सुरेन्द्र सिंह शेखावत, निदेशक (अराजपत्रित), चिकित्सा निदेशालय राकेश कुमार शर्मा, पेंशन विभाग निदेशक, एलआईसी सहित अन्य अवमाननाकर्ता 21 जुलाई 2026 को न्यायालय के समक्ष रहे व्यक्तिश उपस्थित हों। याचीगण साहिल पेमावत व अन्य की ओर से अधिवक्ता यशपाल खिलेरी ने पक्ष रखा। हाईकोर्ट जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने अहम आदेश दिए।बोरूंदा, जिला जोधपुर निवासी याचिकाकर्ता साहिल पेमावत व अन्य की ओर से अधिवक्ता यशपाल ख़िलेरी ने अवमानना याचिका पेश कर बताया कि भंवरी देवी की हत्या 01 सितंबर, 2011 से बकाया सेवा परिलाभ और नियमित पेंशन व सेवानिवृत्ति परिलाभ की गणना कर समस्त परिलाभ दिए जाने के हाइकोर्ट एकलपीठ आदेश के बावजूद पालना नही करने पर एएनएम भंवरी देवी के पुत्र साहिल पेमावत व दोनों पुत्रियों की ओर से अवमानना याचिका दायर की गई। रिट याचिका में एकलपीठ निर्णय 12 जनवरी 2024 को 30 माह बीत जाने के बावजूद याचिकाकर्ताओ को न तो पेंशन दी गई और न ही अन्य बकाया पेंशन परिलाभ इत्यादि का भुगतान किया गया, जबकि हाइकोर्ट एकलपीठ ने रिट याचिका स्वीकारते हुए स्पष्ठ आदेश दिए थे कि मृतका भंवरी देवी के समस्त बकाया सेवा परिलाभ, देय पेंशन एवं अन्य समस्त सेवानिवृत्ति परिलाभ की गणना कर समस्त एरियर का भुगतान मय ब्याज़ भंवरी देवी के वारिसान पुत्र व दोनों पुत्रियों को चार माह के भीतर भीतर देवे और चिकित्सा विभाग को यह भी छूट दी गयी कि वह मृतका भंवरी देवी के मृत्यू बाबत आवश्यक सूचना और सर्विस बुक के लिए अधीनस्थ न्यायालय में आवेदन कर प्राप्त कर सकेगा। इसके बावजूद बीसीएमओ बिलाड़ा एवं जोधपुर सीएमएचओ कार्यालय ने भंवरी देवी का मृत्यु बाबत प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं होने का बहाना बनाकर मामले को ही लटका रखा है। जबकि तत्कालीन जोधपुर सीएमएचओ ने ही आदेश 16 जनवरी 2012 जारी कर भंवरी देवी को मृत मानकर उसका सेवा पृथक आदेश जारी किया था। साथ ही, निदेशक, चिकित्सा विभाग, जयपुर ने अनुकंपा नियुक्ति आदेश 28.02.2012 जारी कर भंवरी देवी के पुत्र को अनुकंपा नियुक्ति दी गई थी। लेकिन जोधपुर सीएमएचओ कार्यालय भंवरी देवी को मृत मानने को ही तैयार नहीं होकर पेंशन परिलाभ को जारी नहीं कर रहा है और न ही अधीनस्थ न्यायालय से भंवरी देवी की मूल सेवा पुस्तिका लेने के लिए कोई कार्रवाई की। अवमानना याचिका के नोटिस तामील हो जाने के बावज़ूद पालना रिपोर्ट पेश नहीं करने और बारबार पालना के लिए समय चाहने को गंभीर मानते हुए हाइकोर्ट एकलपीठ न्यायाधीश अशोक कुमार जैन ने आदेश दिया कि अवमाननाकर्ता दिनांक 18 जुलाई तक आदेश की पूर्ण पालना कर दें, अन्यथा चिकित्सा सचिव गायत्री राठौड़, जोधपुर सीएमएचओ डॉ सुरेन्द्र सिंह शेखावत, निदेशक (अराजपत्रित), चिकित्सा निदेशालय राकेश कुमार शर्मा, पेंशन विभाग निदेशक, एलआईसी सहित अप्रार्थी अवमाननाकर्ताओं को दिनांक 21 जुलाई 2026 को न्यायालय के समक्ष व्यक्तिश: उपस्थित रहने के दिए आदेश दिए।