12 Feb 2026
गुवाहाटी, 12 फरवरी (हि.स.)। असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और एआईसीसी के नेता जितेंद्र सिंह को 9 मार्च को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया है। बीते 9 फरवरी को एक संवाददाता सम्मेलन में उपरोक्त कांग्रेस नेताओं मुख्यंत्री पर अवैध जमीन हथियाने का आरोप लगाया था। इन आरोपों के सिलसिले में आरोप है कि असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा के पास गैर-कानूनी तरीके से 12 हजार बीघा जमीन है। कामरूप महानगर सिविल कोर्ट के आदेश के बारे में असम के एडवोकेट जनरल देवजीत लोन सैकिया ने आज एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि मुख्यमंत्री ने तीनों नेताओं को अपने दावों को साबित करने की चुनौती दी थी और सबूत न देने पर 500 करोड़ रुपये का हर्जाना मांगा था। इन आरोपों की रिपोर्ट 5 फरवरी को एक न्यूज़ पब्लिकेशन में छपी थी, जिसमें मुख्यमंत्री पर गैर-कानूनी ज़मीन-जायदाद रखने का आरोप लगाया गया था। इसके जवाब में, डॉ. सरमा ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और इन दावों को मानहानि करने वाला और बेबुनियाद बताया। रिकॉर्ड में रखे गए डॉक्यूमेंट्स को देखने और वेरिफाई करने के बाद, जस्टिस नयन ज्योति सरमा ने मुख्यमंत्री के पक्ष में अंतरिम स्टे ऑर्डर दिया। कोर्ट ने तीनों नेताओं को अगले आदेश तक डॉ. सरमा और उनकी प्रॉपर्टी के बारे में और कोई बयान या आरोप लगाने से रोक दिया है। जिस अखबार ने यह रिपोर्ट छापी थी, उसके मालिक जयंत बरुवा, पब्लिशर और संबंधित स्टाफ रिपोर्टर को भी नोटिस भेजे गए हैं। उन्हें भी 9 मार्च को कोर्ट के सामने पेश होने और छपे आरोपों पर सबूत पेश करने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने मामले का फैसला आने तक मुख्यमंत्री पर गैर-कानूनी ज़मीन के मालिकाना हक का आरोप लगाने वाली और रिपोर्ट छापने पर भी रोक लगा दी है। मामले की आगे की सुनवाई 9 मार्च को होगी।