06 Apr 2026
नई दिल्ली, 06 अप्रैल (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की कक्षा 8 की पुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़ा एक अध्याय लिखने के लिए जिन तीन शिक्षाविदों को ब्लैकलिस्ट किया था उन्होंने अपने खिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाने की मांग की है। तीनों ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर उनके खिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाने की मांग की है।
तीनों याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मेंशन करते हुए इस पर सुनवाई की मांग की। तब न्यायालय ने कहा कि ये याचिका दोष निवारण के बाद लिस्ट की जाएगी।
न्यायालय ने 8 मार्च को इसके जिम्मेदार लोगों को भी सरकारी कामों से हटाने का आदेश दिया था। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने प्रोफेसर मिशेल डैनिनो, दिवाकर और आलोक प्रसन्ना कुमार के खिलाफ ये आदेश जारी किया था। न्यायालय ने कहा था कि हम ये साफ कर देना चाहते हैं कि या तो इन लोगों को न्यायपालिका के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है या जानबूझकर इसे गलत तरीके से पेश किया गया है। इन लोगों का उद्देश्य आठवीं कक्षा के छात्रों के बीच न्यायपालिका की नकारात्मक छवि पेश करना था। आठवीं कक्षा सीखने की कच्ची उम्र होती है।
कोर्ट ने एनसीईआरटी और केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वो ये सुनिश्चित करें कि इस किताब की सभी प्रतियों को हर जगह से हटाया जाए ताकि वो आम लोगों तक नहीं पहुंच सके। कोर्ट ने कहा था कि इस किताब को आनलाइन या फिजिकल किसी भी तरह से शेयर करने को कोर्ट के आदेश की अवमानना माना जाएगा।