10 Apr 2026
नई दिल्ली, 10 अप्रैल (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने 2027 में होने वाली जाति जनगणना पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता को इस बात के लिए फटकार लगाई कि उसकी याचिका की भाषा बदतमीजी से भरी हुई थी। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ता से कहा कि ये बदतमीजी की भाषा कहां से लेकर आते हैं आपलोग। कैसे लिखते हैं अपलोड पिटीशन। याचिका में जाति जनगणना 2027 पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा गया था कि आबादी के मुताबिक संसाधन का जिम्मेदारीपूर्वक बंटवारा हो। याचिका में कहा गया था कि एक बच्चे वाले परिवारों को आर्थिक प्रोत्साहन उपलब्ध कराने का दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। उच्चतम न्यायालय ने 2 फरवरी को भी जाति जनगणना के तरीके, उसके वर्गीकरण और सत्यापन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। साल 2027 की जनगणना देश की 16वीं राष्ट्रीय जनगणना होगी। यह 1931 के बाद पहली बार है, जब व्यापक स्तर पर जाति आधारित गणना होगी।