09 May 2026
चेन्नई, 9 मई, (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। तमिलनाडु की राजनीति में आज शाम एक ऐतिहासिक मोड़ आया जब थोल तिरुमावलवन की पार्टी वीसीके (VCK) और आईयूएमएल (IUML) ने आधिकारिक तौर पर अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्टी कड़गम (TVK) को अपना समर्थन दे दिया। इस समर्थन के साथ ही राज्य में पिछले कई दिनों से जारी राजनीतिक गतिरोध खत्म हो गया है और विजय का मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है।
बहुमत का आंकड़ा हुआ पार:
हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में टीवीके 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी लेकिन वह बहुमत के जादुई आंकड़े 118 से पीछे रह गई थी। आज शाम वीसीके प्रमुख तिरुमावलवन ने टीवीके के वरिष्ठ नेताओं को अपना 'समर्थन पत्र' सौंपा। इस नए समीकरण के साथ टीवीके नीत गठबंधन की स्थिति बदल गई है। टीवीके की कुल 107 सीटें (विजय की एक सीट छोड़ने के बाद) हैं। कांग्रेस की 5, वामपंथी दल (CPI & CPM) 4 और वीसीके (VCK) की 2 सीटें हैं। इन्हें मिलाकर कुल आंकड़ा: 118 (पूर्ण बहुमत) हो जाता है लेकिन आईयूएमएल के समर्थन के बाद अब यह आंकड़ा बढ़कर 121 सीट हो गया, जो बहुमत से तीन सीट ज्यादा है।
उधर कांग्रेस ने हॉर्स ट्रेडिंग के डर से अपने पांच विधायकों को हैदराबाद भेज दिया है। पार्टी सूत्रों का कहना है की मेलुर विधायक पी विश्वनाथन इनका नेतृत्व कर रहे हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि सरकार बनने पर विश्वनाथन को मंत्री पद से नवाजा जा सकता।
द्रविड़ राजनीति के किले में सेंध:
पिछले 50 से अधिक वर्षों से तमिलनाडु की सत्ता बारी-बारी से DMK और AIADMK के पास रही है। यह पहली बार है जब किसी गैर-द्रविड़ प्रमुख दल ने राज्य में सबसे अधिक सीटें जीती हैं और पहली बार राज्य में एक 'गठबंधन सरकार' (Coalition Government) बनने जा रही है।
राज्यपाल से मिलेंगे विजय:
वीसीके का समर्थन पत्र मिलने के तुरंत बाद विजय के आज शाम राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मिलने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार वे राज्यपाल के समक्ष 118 विधायकों का समर्थन पेश कर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। इससे पहले राज्यपाल ने स्पष्ट बहुमत न होने के कारण शपथ ग्रहण के लिए समय देने से इनकार कर दिया था।
डीएमके-एआईएडीएमके की कोशिशें नाकाम:
विभिन्न स्रोतों से मिल रही जानकारी के अनुसार विजय को सत्ता से दूर रखने के लिए धुर-विरोधी दल डीएमके और एआईएडीएमके के बीच भी पर्दे के पीछे बातचीत चल रही थी, लेकिन वीसीके के इस फैसले ने पुरानी पार्टियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है।