14 Apr 2026
बिलासपुर , 14 अप्रैल (हि.स.)। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने सीतापुर विधानसभा क्षेत्र (अनुसूचित जनजाति आरक्षित) से भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो के जाति प्रमाण पत्र विवाद में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने आज रायगढ़ कलेक्टर और जिला स्तरीय सत्यापन समिति को निर्देश दिया है कि लंबित मामले में 90 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय लिया जाए। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के जस्टिस पी. सैम कोशी की सिंगल बेंच में सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो के जाति प्रमाणपत्र विवाद मामले में सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया गया है। इस मामले में याचिकाकर्ता बिहारी लाल तिर्की ने आरोप लगाया है कि जिला प्रशासन द्वारा सुनवाई को लगातार टाला जा रहा था, जिसके कारण उन्हें न्याय के लिए उच्च न्यायालय का रुख करना पड़ा। याचिका में आरोप लगाया गया है कि उनके पिता गणेश राम झारखंड से आए थे और उनके जाति संबंधी दस्तावेजों में कई विसंगतियां हैं, जैसे कि ग्राम सभा के प्रस्ताव में जाति का स्पष्ट उल्लेख न होना। उन्होंने वर्ष 2023 में इस संबंध में याचिका दायर की थी। याचिका में विधायक रामकुमार टोप्पो के 19 सितंबर 2023 को रायगढ़ से जारी जाति प्रमाणपत्र पर आपत्ति जताई गई थी। इस संबंध में तिर्की ने जिला स्तरीय छानबीन समिति के समक्ष भी शिकायत प्रस्तुत की थी, लेकिन विधानसभा चुनाव के चलते प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। याचिकाकर्ता के वकील ने आरोप लगाया कि सितंबर 2023 में लैलूंगा एसडीओ द्वारा जारी स्थायी जाति प्रमाण पत्र के लिए ग्राम सभा के जिस प्रस्ताव का उपयोग किया गया, उसमें विशिष्ट जाति का उल्लेख नहीं था, जो कानूनी रूप से गलत है। मामला लंबे समय तक लंबित रहने पर याचिकाकर्ता ने पुनः उच्च न्यायालय में गुहार लगाई, जिसके बाद अदालत ने सुनवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले भी उच्च न्यायालय ने रायगढ़ की जिला स्तरीय छानबीन समिति को जांच पूरी करने के निर्देश दिए थे, लेकिन दो वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया। याचिकाकर्ता का कहना है कि जिला प्रशासन जानबूझकर जांच को लंबित रखे हुए है, जिससे उन्हें दोबारा न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। बिहारी लाल तिर्की ने जाति प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि यह प्रमाणपत्र बिना आवश्यक सेटलमेंट प्रक्रिया पूरी किए जारी किया गया, जबकि नियमों के अनुसार प्रमाणपत्र सरलीकरण के प्रावधानों के तहत बनाए जाते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि विधायक रामकुमार टोप्पो के पिता गणेश राम वर्ष 1980 में झारखंड से आकर बसे थे और उनके नाम पर छत्तीसगढ़ में कोई भूमि दर्ज नहीं है। ऐसे में नियमों की अनदेखी कर प्रमाणपत्र जारी किया गया और अब प्रशासन कथित गड़बड़ियों को छिपाने के लिए जांच में देरी कर रहा है। उच्च न्यायालय के इस निर्देश के बाद अब सभी की नजरें जिला स्तरीय सत्यापन समिति के फैसले पर टिकी हैं, जो तय समयसीमा के भीतर इस विवाद पर अंतिम निर्णय देगी। रामकुमार टोप्पो ने 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में सीतापुर सीट से कांग्रेस के कद्दावर नेता और तत्कालीन खाद्य मंत्री अमरजीत भगत को हराकर जीत दर्ज की थी। यह मामला अब उनके विधायक पद के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हो गया है।