08 Jul 2026
नई दिल्ली, 8 जुलाई (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। राजधानी में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को अधिक प्रभावी और जनभागीदारी आधारित बनाने की दिशा में नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने बुधवार को बड़ा कदम उठाया। एनडीएमसी ने चिंतन एनवायरनमेंटल रिसर्च एंड एक्शन ग्रुप के सहयोग से 'वेस्ट वाइज़ सिटिज़न्स – ए प्रैक्टिकल गाइड टू मेकिंग द सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (एसडब्ल्यूएम) रूल्स, 2026 पार्ट ऑफ आवर डेली लाइव्स' नामक नागरिक जागरूकता पुस्तिका का विमोचन किया। इसके साथ ही घर-घर से पुनर्चक्रण योग्य कचरा एकत्र करने के लिए 'आरआरआर ऑन व्हील्स' वाहनों को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
एनडीसीसी फेज-2 स्थित सम्मेलन कक्ष में आयोजित कार्यक्रम में एनडीएमसी के अध्यक्ष केशव चंद्रा ने पुस्तिका का विमोचन किया। कार्यक्रम में एनडीएमसी के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा चिंतन एनवायरनमेंटल रिसर्च एंड एक्शन ग्रुप के प्रतिनिधि, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए), मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन (एमटीए), शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधि, बल्क वेस्ट जनरेटर्स (बीडब्ल्यूजी), स्वच्छता अधिकारी तथा अन्य हितधारक मौजूद रहे।
'स्रोत पर कचरा अलग करना सबसे जरूरी कदम'
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एनडीएमसी अध्यक्ष केशव चंद्रा ने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 को आम नागरिकों तक सरल भाषा में पहुंचाने के उद्देश्य से यह पुस्तिका तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन की शुरुआत घरों, कार्यालयों और संस्थानों में स्रोत स्तर पर कचरे के पृथक्करण से होती है।
उन्होंने कहा कि कचरा प्रबंधन केवल नगर निकाय की जिम्मेदारी नहीं है। प्रत्येक नागरिक, परिवार, संस्थान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान की सक्रिय भागीदारी से ही वैज्ञानिक और टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था विकसित की जा सकती है। नगर निकाय की भूमिका पृथक किए गए कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और संसाधनों की पुनर्प्राप्ति सुनिश्चित करना है।
चार श्रेणियों में कचरा अलग करने की सलाह
चिंतन एनवायरनमेंटल रिसर्च एंड एक्शन ग्रुप की निदेशक भारती चतुर्वेदी ने बताया कि हिंदी और अंग्रेज़ी में प्रकाशित यह पुस्तिका नागरिकों के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका है। इसमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत नागरिकों, संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जिम्मेदारियों को सरल भाषा में समझाया गया है।
पुस्तिका में कचरे को चार श्रेणियों—गीला (जैविक), सूखा (अजैविक), सैनिटरी और विशेष देखभाल श्रेणी के कचरे—में अलग करने की प्रक्रिया विस्तार से बताई गई है। इसके अलावा कम्पोस्टिंग, पुनर्चक्रण, वैज्ञानिक निस्तारण, लैंडफिल पर निर्भरता कम करने और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के उपाय भी शामिल किए गए हैं।
इसमें प्लास्टिक, कागज, ई-वेस्ट, बैटरियां, वस्त्र, धातु, घरेलू खतरनाक कचरा, टायर और सैनिटरी कचरे के सुरक्षित प्रबंधन पर अलग-अलग अध्याय भी दिए गए हैं।
'RRR on Wheels' अब पहुंचेगा सीधे घरों तक
एनडीएमसी ने कार्यक्रम के दौरान 'आरआरआर ऑन व्हील्स' पहल की भी शुरुआत की। इसके तहत अब पुनर्चक्रण योग्य सामग्री, ई-वेस्ट, कपड़े और अन्य सूखे कचरे का संग्रहण सीधे लोगों के घरों से किया जाएगा। यह सेवा विशेष रूप से उन नागरिकों के लिए उपयोगी होगी, जो घर पर कचरे का पृथक्करण तो करते हैं, लेकिन उसे आरआरआर केंद्र तक नहीं पहुंचा पाते।
एनडीएमसी के अनुसार यह पहल मौजूदा निःशुल्क संग्रहण व्यवस्था को और मजबूत करेगी तथा पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अधिकृत रीसाइक्लर्स तक पहुंचाने में मदद करेगी। इससे स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण को बढ़ावा मिलेगा और 'ज़ीरो वेस्ट' अभियान को नई गति मिलेगी।
कचरा संग्रहकर्ताओं को मिलेगा सम्मानजनक रोजगार
इस पहल के तहत प्रशिक्षित कचरा संग्रहकर्ताओं को भी अभियान से जोड़ा जाएगा। उन्हें NAMASTE जैसी औपचारिक पहचान और आजीविका योजनाओं से जोड़ने की व्यवस्था की जाएगी, जिससे कचरा संग्रहण क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों को सुरक्षित, सम्मानजनक और बेहतर रोजगार के अवसर मिल सकें।
जनभागीदारी से बनेगा स्वच्छ और टिकाऊ शहर
एनडीएमसी और चिंतन एनवायरनमेंटल रिसर्च एंड एक्शन ग्रुप द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई यह पुस्तिका केवल नियमों की जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों को कचरा कम करने, वस्तुओं के पुनः उपयोग, मरम्मत, पुनर्चक्रण और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित करती है।
एनडीएमसी का मानना है कि यदि नागरिक स्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण सुनिश्चित करें और पुनर्चक्रण व्यवस्था में सक्रिय सहयोग दें, तो लैंडफिल पर निर्भरता कम होगी, संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और दिल्ली को स्वच्छ, हरित तथा टिकाऊ शहर बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।