22 May 2026
नई दिल्ली, 22 मई (एजेंसी)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली आबकारी घोटाला मामले में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को निशाना बनाने को लेकर गोपाल राय और पत्रकार सौरव दास को अवमानना नोटिस जारी किया है। अरविंद केजरीवाल को पहले ही नोटिस भेजा जा चुका है। जस्टिस नवीन चावला की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस मामले में न्यायालय पहले ही संज्ञान ले चुकी है, ऐसे में कई याचिकाएं नहीं सुनी जा सकती हैं। हम उन प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर रहे हैं जो पहले की याचिका में पक्षकार नहीं थे। मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी। सुनवाई के दौरान वकील अशोक चैतन्य ने कहा कि उन्होंने पत्रकार श्याम मीरा सिंह के खिलाफ भी न्यायालय की अवमानना चलाने के लिए सहमति मांगी थी लेकिन उसे अस्वीकार कर दिया गया। श्याम मीरा सिंह को लेकर वो अलग से याचिका दायर करेंगे। न्यायालय ने कहा कि एकल पीठ ने इस मामले के प्रतिवादी अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज के खिलाफ अवमानना प्रक्रिया शुरु की थी। हमने उन्हें नोटिस भी जारी किया था। हम इस मामले के दूसरे प्रतिवादियों गोपाल राय और पत्रकार सौरव दास को नोटिस जारी कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि हमने इस मामले में एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। याचिका की प्रति एमिकस क्यूरी को भी दी जाए। वकील अशोक चैतन्य ने कोर्ट से अवमानना वाले कंटेंट को संरक्षित रखे जाने की मांग की जिसके बाद कोर्ट ने रजिस्ट्री को उन कंटेंट के संरक्षण का आदेश दिया। याचिका वकील अशोक चैतन्य ने दायर की है। याचिकाकर्ता ने इसके पहले एएसजी संजीव भंडारी से न्यायालय की अवमानना चलाने के लिए सहमति मांगी गई। एएसजी संजीव भंडारी ने याचिकाकर्ता को केजरीवाल समेत दूसरे आरोपियों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना चलाने की अनुमति दे दी थी जिसके बाद कोर्ट में याचिका दायर की गई है। उल्लेखनीय है कि इसके पहले जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने खुद केजरीवाल समेत छह आरोपियों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू किया था। अवमानना कार्यवाही पर सुनवाई करते हुए जस्टिस नवीन चावला की अध्यक्षता वाली बेंच ने 19 मई को केजरीवाल समेत छह आरोपियों को नोटिस जारी किया था। इस नई अवमानना याचिका में आप नेताओं के अलावा पत्रकार सौरव दास को भी आरोपी बनाया गया है। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने 14 मई को अवमानना कार्यवाही शुरू करते हुए कहा था कि अगर इन आरोपियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो अराजकता फैलेगी। जब संस्था को ट्रायल पर रखा जाता है तो ये जज का कर्तव्य है कि वो इन आरोपों से संचालित न हों। कोर्ट को ये पता चला कि पत्र और वीडियो के जरिये सोशल मीडिया कैंपेन चलाया गया जो काफी सर्कुलेट हुआ। ये एक सुनियोजित और संगठित कैंपेन था। जस्टिस शर्मा ने कहा था कि कोर्ट के अंदर हुई कार्यवाही को कोर्ट के बाहर एक समानांतर नैरेटिव चलाया गया।