19 Mar 2026
नई दिल्ली, 19 मार्च (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय संविधान बेंच ने 'उद्योग' शब्द की परिभाषा से जुड़े 1978 के एक फैसले की कानूनी वैधता पर सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल (एजी) आर. वेंकटरमणी, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) केएम नटराज, इंदिरा जय सिंह, शेखर नफड़े, सीयू सिंह, संजय हेगड़े आदि वकीलों ने दलीलें रखीं। ये सुनवाई 17 मार्च से शुरु होकर आज खत्म हुई। उच्चतम न्यायालय की सात सदस्यीय बेंच ने 1978 के फैसले में 'उद्योग' की परिभाषा का विस्तार किया था, जिससे लाखों कर्मचारियों को औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत सुरक्षा मिली हुई थी। 1978 में सात जजों की बेंच ने फैसला दिया था, जिसमें बेंगलुरु जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड के मामले में उद्योग शब्द की व्यापक व्याख्या की गई थी। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान ये साफ कर दिया कि उसका मुख्य उद्देश्य 1978 के फैसले की कानूनी वैधता की पड़ताल करनी है। कोर्ट ने साफ किया कि वह औद्योगिक विवाद अधिनियम या 2020 के औद्योगिक संबंध संहिता में उद्योग की परिभाषा पर विचार नहीं करेगी, क्योंकि ये कानून या तो लागू नहीं हुए हैं या भविष्य में कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। नौ सदस्यीय संविधान पीठ में चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस उज्जवल भूइयां, जस्टिस दीपांकर दत्ता, जस्टिस जॉयमाल्या बागची, जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा, जस्टिस वीएम पंचोली, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे हैं।