12 May 2026
चेन्नई, 12 मई (एजेंसी)। मद्रास उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक अंतरिम आदेश जारी कर तमिलगा वेत्रि कषगम (टीवीके) के विधायक श्रीनिवास सेठुपति को विधानसभा में होने वाले विश्वास मत की कार्यवाही में भाग लेने से रोक दिया है। कोर्ट ने यह आदेश पूर्व मंत्री पेरियाकरुप्पन की डाक मतपत्रों में गड़बड़ी की शिकायत दर्ज कराने के बाद दिया गया। तमिलनाडु में हाल ही में सम्पन्न हुए 17वें विधानसभा चुनाव में शिवगंगा जिले की तिरुप्पतुर सीट पर चुनाव लड़ने वाले द्रमुक के पूर्व मंत्री पेरियाकरुप्पन, टीवीके उम्मीदवार श्रीनिवास सेतुपति से मात्र एक वोट के अंतर से हार गए थे। उन्हें कुल 83,374 वोट मिले थे। इसके बाद पेरियाकरुप्पन ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि तिरुपत्तूर विधानसभा क्षेत्र का एक डाक मतपत्र गलती से वेल्लोर के पास स्थित दूसरे तिरुपत्तूर विधानसभा क्षेत्र संख्या 50 में चला गया। उन्होंने मांग की कि उस वोट को शिवगंगा जिले के तिरुपत्तूर विधानसभा क्षेत्र संख्या 185 में जोड़ा जाए। चुनाव आयोग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं किए जाने पर पेरियाकरुप्पन ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने मांग की कि डाक मतपत्रों को सुरक्षित रखा जाए, मतगणना से संबंधित वीडियो फुटेज संरक्षित किए जाएं और तब तक विजयी उम्मीदवार को विधायक के रूप में कार्य करने से रोका जाए। इस मामले की सुनवाई रविवार, 10 मई को तत्काल आधार पर हुई। अदालत ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा। बाद में हुई सुनवाई में पेरियाकरुप्पन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने कहा कि चुनाव आयोग ने डाक मतपत्र बदलने के मामले में स्पष्ट जवाब नहीं दिया है और उसकी लापरवाही के कारण एक उम्मीदवार की जीत छिन गई। वहीं चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील ने कहा कि डाक मतपत्र बदलने की कोई शिकायत नहीं मिली थी। उन्होंने बताया कि मतगणना शुरू होने के बाद देर से पहुंचे डाक मतपत्रों को नियमों के अनुसार गिना नहीं जा सकता। इसके बाद न्यायमूर्ति एल. विक्टोरिया गौरी और एन. सेन्थिल कुमार की पीठ ने आज अंतरिम आदेश जारी किया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि पेरियाकरुप्पन की शिकायत में पर्याप्त आधार हैं। इसलिए अगली सुनवाई तक तिरुपत्तूर के टीवीके विधायक श्रीनिवास सेतुपति को विधानसभा में होने वाले विश्वास मत, अविश्वास प्रस्ताव और अन्य मतदान प्रक्रियाओं में भाग लेने से रोका जाता है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने श्रीनिवास सेतुपति की चुनावी जीत को रद्द नहीं किया है, लेकिन इसे उनकी जीत की वैध स्वीकृति भी नहीं माना जाना चाहिए। अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि मतगणना से जुड़े सभी दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग रिकॉर्ड, डाक मतपत्र, निरस्त किए गए डाक मतपत्र और उनके लिफाफों को सुरक्षित रखा जाए। इसके अलावा, यदि विधानसभा क्षेत्र संख्या 50 से क्षेत्र संख्या 185 के लिए कोई डाक मतपत्र आया हो तो उसे खोले बिना सुरक्षित रखा जाए। अदालत ने कहा कि दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के इस आदेश का पहले घोषित चुनाव परिणामों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और इसे पुनर्मतगणना का आदेश भी नहीं माना जाना चाहिए। साथ ही अदालत ने चुनाव आयोग को यह जांच करने का निर्देश दिया कि तिरुपत्तूर सीट पर कुल कितने डाक मतपत्र थे, उनमें कितने वोट डाले गए और कितने मतपत्र दूसरे निर्वाचन क्षेत्रों में चले गए। मामले की अगली सुनवाई 19 जून को होगी।