05 Jul 2026
नईदिल्ली|मॉस्को, 5 जुलाई (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल निर्यातकों में शामिल रूस इन दिनों पेट्रोल की कमी से जूझ रहा है। स्थिति ऐसी बन गई है कि उसे भारत समेत अन्य देशों से पेट्रोल आयात करना पड़ रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमले हैं, जिन्होंने रूस की कई प्रमुख रिफाइनरियों और तेल भंडारण केंद्रों को नुकसान पहुंचाया है। रिपोर्टों के अनुसार, मार्च 2026 से अब तक यूक्रेन ने रूस की रिफाइनरियों, तेल डिपो और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर 50 से अधिक हमले किए हैं। इन हमलों के कारण रूस की लगभग एक-तिहाई रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित हुई है। पेट्रोल उत्पादन में करीब 17 प्रतिशत और कच्चे तेल की रिफाइनिंग में लगभग 25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो पिछले दो दशकों का सबसे निचला स्तर बताया जा रहा है। ईंधन संकट से निपटने के लिए रूस ने भारत से समुद्री मार्ग के जरिए कम से कम 60,000 टन पेट्रोल मंगाया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, रूस जरूरत पड़ने पर हर महीने लगभग 4 लाख टन पेट्रोल आयात करने की तैयारी भी कर रहा है। बेलारूस से भी ईंधन की आपूर्ति बढ़ाई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि रूस के पास कच्चे तेल की कमी नहीं है। समस्या यह है कि रिफाइनरियों के क्षतिग्रस्त होने और मरम्मत में देरी के कारण वह पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल और अन्य रिफाइंड ईंधन नहीं बना पा रहा है। पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते आधुनिक उपकरण और स्पेयर पार्ट्स जुटाना भी चुनौती बना हुआ है। रूस सरकार ने संकट से निपटने के लिए पेट्रोल के निर्यात पर नियंत्रण, ईंधन आयात बढ़ाने और कुछ मामलों में कम गुणवत्ता वाले ईंधन के अस्थायी उत्पादन जैसे कदम उठाए हैं। इसके बावजूद देश के कई हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें, राशनिंग और बढ़ती कीमतें देखने को मिल रही हैं। यानी, रूस आज भी कच्चे तेल का बड़ा निर्यातक है, लेकिन यूक्रेन के हमलों से प्रभावित रिफाइनिंग क्षमता के कारण उसे पहली बार बड़े पैमाने पर पेट्रोल आयात करना पड़ रहा है।