18 Apr 2026
जोधपुर, 18 अप्रैल (हि.स.)। राज्य उपभोक्ता आयोग जोधपुर पीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि केवल अस्थायी परमिट के आधार पर बीमा दावा पूरी तरह अस्वीकृत नहीं किया जा सकता। आयोग ने बीमा कंपनी की अपील खारिज करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग जैसलमेर के आदेश को बरकरार रखा और 75 प्रतिशत नॉन-स्टैंडर्ड बीमा राशि देने के निर्देश को उचित ठहराया। मामले के अनुसार यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी ने जिला आयोग जैसलमेर के उस आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी, जिसमें दुर्घटनाग्रस्त बस के लिए बीमा राशि का 75 प्रतिशत भुगतान करने का निर्देश दिया गया था। बीमा कंपनी ने अपने पक्ष में तर्क दिया कि नवंबर 2020 में मांगलियावास में हुई दुर्घटना की सूचना उन्हें विलंब से दी गई थी तथा वाहन निर्धारित परमिट शर्तों का उल्लंघन करते हुए चलाया जा रहा था। कंपनी के अनुसार, बस का परमिट जैसलमेर से बाड़मेर वाया डांगरी गांव के लिए था, जबकि दुर्घटना के समय उसे जयपुर से जैसलमेर ले जाया जा रहा था। साथ ही, वाहन में क्षमता से अधिक सवारियां होने और सूचना एक माह बाद दिए जाने का भी हवाला देते हुए दावा अस्वीकार किया गया। वहीं, परिवादी पक्ष ने बताया कि दुर्घटना के समय वाहन के पास जयपुर से जैसलमेर तक के लिए एक दिन का अस्थायी परमिट वैध रूप से मौजूद था। दुर्घटना के तुरंत बाद एफआईआर दर्ज कराई गई और बीमा कंपनी को भी सूचना दी गई। वाहन को अधिकृत सर्विस सेंटर भेजा गया, जहां मरम्मत का अनुमान 15,78,330 रुपये लगाया गया था। मामले की सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष देवेंद्र कच्छावाहा, सदस्य (न्यायिक) सुरेंद्र सिंह और सदस्य लियाकत अली ने पाया कि बीमा कंपनी दावा अस्वीकृत करने के ठोस आधार प्रस्तुत करने में असफल रही। आयोग ने कहा कि सूचना देने में हुई कथित देरी का मामले पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता और बीमा कंपनी इस संबंध में कोई ठोस साक्ष्य भी पेश नहीं कर सकी। आयोग ने अपने फैसले में यह भी कहा कि जब वाहन के पास वैध अस्थायी परमिट मौजूद था, तो केवल परमिट के आधार पर दावा खारिज करना सेवा में कमी (डिफिशिएंसी इन सर्विस) माना जाएगा। अंतत: आयोग ने बीमा कंपनी की अपील को खारिज करते हुए जिला आयोग के आदेश को यथावत रखा और बीमा कंपनी को 75 प्रतिशत नॉन-स्टैंडर्ड बीमा राशि का भुगतान करने के निर्देश दिए।