26 Aug 2026
काठमांडू/नई दिल्ली, 26 अगस्त (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। नेपाल-तिब्बत सीमा पर बुधवार सुबह आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने कुछ ही घंटों में बड़े इलाके को तबाही में बदल दिया। भोटेकोशी नदी में अचानक आए उफान ने रसुवा जिले के सीमावर्ती इलाकों समेत कई बस्तियों, सड़कों, पुलों और बिजली परियोजनाओं को अपनी चपेट में ले लिया। देर रात तक नेपाल में मृतकों की संख्या 95 पहुंच गई, जबकि करीब 400 लोग लापता बताए जा रहे हैं। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी तीन मौतों की पुष्टि हुई है। इस तरह दोनों तरफ मृतकों की संख्या कम से कम 98 हो गई है।
सुबह करीब 9 बजे आया सैलाब
तबाही की शुरुआत बुधवार सुबह करीब 9 बजे स्थानीय समय में हुई। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक तिब्बत की तरफ से आए पानी और मलबे ने भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ा दिया। कुछ ही देर में रसुवा के तिमुरे और स्याफ्रुबेसी इलाकों में पानी और मलबा घुस गया। वाहन, इमारतें, सड़कें और पुल बहने लगे। नेपाल प्रशासन ने रसुवा के साथ नुवाकोट, धादिंग, चितवन और गोरखा में भी हाई अलर्ट जारी किया।
पहले खबर आई कम मौतों की, फिर बढ़ता गया आंकड़ा
सुबह शुरुआती रिपोर्टों में कुछ मौतों की पुष्टि हुई थी और बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की बात सामने आई। जैसे-जैसे बचाव दल प्रभावित इलाकों तक पहुंचे, तबाही का पैमाना सामने आने लगा। शाम तक मृतकों की संख्या 20 से ऊपर पहुंची और रात तक नेपाल सरकार तथा स्थानीय प्रशासन से मिले ताजा अपडेट में यह आंकड़ा 90 से अधिक हो गया। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने रात में देश को संबोधित करते हुए 90 से अधिक मौतों और 250 से ज्यादा लोगों के बचाए जाने की जानकारी दी।
384 यात्री लापता, इनमें बड़ी संख्या विदेशी
नेपाल पर्यटन बोर्ड की प्रारंभिक सूची के मुताबिक प्रभावित क्षेत्र में 384 यात्री लापता हैं। इनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक बताए गए हैं। विदेशी लापता लोगों में बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की है। उपलब्ध प्रारंभिक आंकड़ों में कम से कम 105 भारतीयों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। कई यात्री कैलाश-मानसरोवर यात्रा से जुड़े बताए जा रहे हैं।
बचाव में उतरी सेना, 14 हेलिकॉप्टर तैनात
तबाही के बाद नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस और पुलिस बलों को बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान में लगाया गया। नेपाल सेना ने 14 हेलिकॉप्टर और आपदा प्रतिक्रिया दल तैनात किए। खराब मौसम, कीचड़ और मलबे के कारण कई इलाकों तक पहुंचना मुश्किल बना हुआ है। काठमांडू के अस्पतालों में घायलों के इलाज के लिए करीब 100 बेड आरक्षित किए गए हैं।
पुल-सड़कें और बिजली परियोजनाएं तबाह
फ्लैश फ्लड ने सीमावर्ती इलाके की अहम बुनियादी संरचना को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई पुल और सड़कें बह गईं, जबकि बिजली परियोजनाओं का संचालन भी प्रभावित हुआ। नेपाल और चीन के बीच प्रमुख सीमा मार्ग पर संपर्क और संचार व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा है। चीन के तिब्बत स्थित ग्यिरोंग इलाके में भी भारी तबाही की सूचना है।
ग्लेशियर टूटने से आई तबाही?
वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के शुरुआती आकलन के मुताबिक इस आपदा के पीछे बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के टूटकर नीचे गिरने की घटना हो सकती है। सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण में करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटने के संकेत मिले हैं। इसके बाद बर्फ, चट्टान और मलबे के साथ पानी की तेज लहर नीचे की ओर आई। हालांकि घटना के सटीक कारण की जांच अभी जारी है और हालिया भूकंपीय गतिविधि को भी संभावित कारक माना जा रहा है।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल में बड़ी संख्या में भारतीयों के लापता होने की खबर के बीच भारत ने तत्काल मदद की पेशकश की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात कर जान-माल के नुकसान पर संवेदना जताई और हरसंभव मानवीय सहायता देने का भरोसा दिया। भारत की टीमें नेपाली अधिकारियों के साथ राहत और बचाव प्रयासों के समन्वय में जुटी हैं।
अभी भी जारी है रेस्क्यू ऑपरेशन
रात तक राहत और बचाव अभियान जारी रहा। बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं और दूरदराज के इलाकों से पूरी जानकारी सामने नहीं आ सकी है। ऐसे में मृतकों और लापता लोगों की संख्या और बढ़ने की आशंका है। नेपाल सरकार ने प्रभावित नदी घाटियों और निचले इलाकों में लोगों को सतर्क रहने को कहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और चरम मौसम की घटनाओं के बढ़ने के कारण ऐसी आपदाओं का खतरा लगातार गंभीर हो रहा है।