05 Aug 2026
मुंबई, 05 अगस्त (एजेंसी)। बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के खिलाफ सोशल मीडिया पर प्रसारित एआई-जनित डीपफेक और मानहानिकारक सामग्री को तत्काल हटाने का निर्देश दिया है। अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से कहा कि वे ऐसी सामग्री की पहचान कर उसके खिलाफ सक्रिय और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि झूठी एवं अपमानजनक सामग्री के प्रसार पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
नितिन गडकरी की ओर से दायर मानहानि याचिका पर बुधवार को न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की एकल पीठ ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अदालत ने मेटा, एक्स कॉर्प और गूगल जैसे सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज से पूछा कि क्या उनके पास ऐसी तकनीकी व्यवस्था उपलब्ध है, जो किसी पीड़ित के कानूनी हस्तक्षेप के बिना ही स्पष्ट रूप से अपमानजनक, अश्लील या मानहानिकारक सामग्री की पहचान कर उसे तत्काल हटा सके।
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब आज अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध है, तब ऐसी व्यवस्था भी होनी चाहिए जो इस प्रकार की सामग्री पर तुरंत कार्रवाई कर सके। न्यायालय ने कहा कि यदि कोई अश्लील या अपमानजनक सामग्री अपलोड होती है तो उसे बिना विलंब हटाया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि नितिन गडकरी ने अंतरिम राहत प्राप्त करने के लिए मजबूत मामला प्रस्तुत किया है। न्यायालय ने विवादित पोस्टों को "घिनौना, अपमानजनक, अश्लील और मानहानिकारक" करार देते हुए कहा कि सार्वजनिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस तरह की सामग्री के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए, विशेषकर तब जब इन मंचों तक बच्चों की भी पहुंच हो।
मेटा और गूगल की ओर से अदालत को बताया गया कि याचिका में उल्लिखित विवादित सामग्री हटा दी जाएगी। इसके बाद न्यायालय ने निर्देश दिया कि यदि भविष्य में गडकरी को इसी प्रकार का कोई अन्य एआई-जनित या डीपफेक कंटेंट मिलता है तो वे संबंधित इंटरमीडियरी को इसकी सूचना दे सकते हैं, जिसके बाद संबंधित प्लेटफॉर्म को आवश्यक कार्रवाई करनी होगी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि गडकरी की याचिका का उद्देश्य निष्पक्ष आलोचना या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं है, बल्कि केवल झूठे, मानहानिकारक और एआई-जनित डीपफेक कंटेंट को हटवाना है। न्यायालय ने यह भी कहा कि जिन मामलों में सामग्री की प्रकृति स्पष्ट नहीं हो, उनमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आवश्यक निर्देश प्राप्त करने के लिए अदालत का रुख कर सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि नितिन गडकरी ने अपने सिविल मुकदमे में मनगढ़ंत पोस्टों को तत्काल हटाने, उनके प्रसार पर स्थायी रोक लगाने तथा 11 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है। याचिका के अनुसार, एआई-जनित डीपफेक पोस्टों में झूठा दावा किया गया कि गडकरी और उनके परिवार को केंद्र सरकार के ई-20 इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से आर्थिक लाभ हुआ। गडकरी ने कहा है कि नीति के निर्माण या उसके क्रियान्वयन में उनकी कोई भूमिका नहीं रही और उनका उद्देश्य केवल झूठी एवं मानहानिकारक सामग्री के प्रसार को रोकना है।
मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। अदालत ने सभी प्रतिवादियों को निर्धारित समय के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
------------