25 Mar 2026
नई दिल्ली, 25 मार्च (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने भूमि अधिग्रहण के मामले में किसानों को राहत दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि 2013 से पहले अधिग्रहित भूमि के लिए भी बढ़े हुए मुआवजा और ब्याज का भुगतान किया जाना चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने साफ किया कि सिर्फ वित्तीय बोझ का हवाला देकर किसानों का मुआवजा नहीं घटाया जा सकता है। दरअसल, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर 2013 से पहले विभिन्न राजमार्ग परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित भूमि पर दिए बढ़े मुआवजे और ब्याज के पुराने फैसलों की समीक्षा की मांग की थी। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का कहना था कि 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के बाद ऐसे हजारों मामलों में मुआवजे का भारी वित्तीय बोझ सरकार पर आ गया है। ये करीब 29 हजार करोड़ रुपये का है। उच्चतम न्यायालय ने साफ किया कि केवल भूस्वामी ही बढ़े हुए ब्याज का दावा करने के हकदार होंगे, जिनके बढ़े हुए मुआवजे के मामले 28 मार्च 2015 तक किसी फोरम के समक्ष लंबित थे। इस तिथि तक ही लंबित रहे मामलों में कानून के मुताबिक बढ़ा हुआ मुआवजा और ब्याज दिया जाए।