01 Aug 2026
गुरुग्राम / नई दिल्ली, 01 अगस्त (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। समर्पण, अनुशासन और अटूट संकल्प की एक मिसाल पेश करते हुए कर्नल रामेश्वर 31 जुलाई 2026 को 40 वर्ष और 9 माह की गौरवपूर्ण सैन्य सेवा के बाद सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हो गए। एक सामान्य सैनिक के रूप में भारतीय सेना में शामिल होकर 'कर्नल' के प्रतिष्ठित पद तक पहुँचने वाली उनकी यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है।
सैन्य परंपरा से मिली प्रेरणा
जुलाई 1969 में हरियाणा के गुरुग्राम जिले के शेखुपुर माजरी गाँव में जन्मे कर्नल रामेश्वर एक प्रतिष्ठित सैन्य परिवार से संबंध रखते हैं। उनके पिता, स्वर्गीय हीरा सिंह ने कुमाऊँ रेजिमेंट और बड़े भाई, स्वर्गीय बिक्रम सिंह ने 13वीं कुमाऊँ बटालियन में देश सेवा की।
इसी गौरवशाली परंपरा से प्रेरित होकर कर्नल रामेश्वर ने अक्टूबर 1985 में कुमाऊँ रेजिमेंट में बतौर सैनिक (सिपाही) भर्ती ली थी। बाद में उनके छोटे भाई महीपाल सिंह ने भी 19वीं कुमाऊँ में सेवा देकर इस पारिवारिक परंपरा को आगे बढ़ाया।
अभियानों में निभाई महत्त्वपूर्ण भूमिका
प्रशिक्षण के बाद उनकी पहली नियुक्ति 18 कुमाऊँ में हुई। उन्होंने ऑपरेशन पवन, ऑपरेशन हिफाज़त और ऑपरेशन पराक्रम जैसे कई कठिन व चुनौतीपूर्ण अभियानों में अग्रिम मोर्चे पर सेवाएँ दीं।
उनकी काबिलियत और समर्पण को देखते हुए सेलेक्शन सेंटर, बेंगलुरु द्वारा उनका चयन स्पेशल लिस्ट (SL) कमीशन के लिए किया गया। कमीशन मिलने के बाद उन्होंने 10वीं सिख रेजिमेंट के साथ जम्मू-कश्मीर में इन्फैंट्री अटैचमेंट पूरा किया और ऑपरेशन रक्षक में सक्रिय भूमिका निभाई।
रचा नया इतिहास
कर्नल रामेश्वर ने अपने करियर में भारतीय सेना के नौ अलग-अलग रिकॉर्ड कार्यालयों में महत्त्वपूर्ण पदों पर काम किया। उन्हें महार रेजिमेंट रिकॉर्ड्स, एमईजी (MEG) रिकॉर्ड्स और आर्मी एयर डिफेंस रिकॉर्ड्स में कमांडिंग ऑफिसर (CO) के रूप में नेतृत्व करने का विशिष्ट गौरव प्राप्त हुआ।
विशेष उपलब्धि
कर्नल रामेश्वर कुमाऊँ रेजिमेंट के स्पेशल लिस्ट (SL) अधिकारियों में एकमात्र ऐसे अधिकारी हैं जिन्होंने 'कर्नल' के पद तक पहुँचने की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।
40 से अधिक वर्षों तक देश की सुरक्षा और सेना के अनुशासन को समर्पित उनका यह जीवन सफर हर युवा के लिए एक उदाहरण है कि कड़ी मेहनत और संकल्प से किसी भी ऊँचाई को छुआ जा सकता है।