01 Apr 2026
-हाईकोर्ट ने 24 अप्रैल तक जवाब तलब किया जोधपुर, 01 अप्रैल (हि.स.)। राजस्थान उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश अरुण मोंगा और न्यायाधीश सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने ग्रुप मेडिक्लेम बीमा पॉलिसी प्रीमियम पर 18 फीसदी जीएसटी वसूलने को चुनौती दिए जाने पर भारत सरकार, केंद्रीय वित्त सचिव, जीएसटी काउंसिल, राज्य सरकार तथा यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को नोटिस जारी कर 24 अप्रैल तक जवाब तलब किया है और आदेश दिया कि जमा जीएसटी रिट याचिका के निर्णयधीन रहेगी। अनिल भंडारी ने अधिवक्ता अनिल भंसाली और सुनील भंडारी के माध्यम से रिट याचिका दायर कर कहा कि जीएसटी काउंसिल ने देश के आम नागरिकों के हितार्थ स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी प्रीमियम पर जीएसटी को समाप्त करने की सिफारिश गत वर्ष तीन सितंबर को की और उसी अनुरूप केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने 17 सितंबर को जारी अधिसूचना में स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर जीएसटी हटाने का प्रावधान किया और अंकित किया कि बीमा प्राप्त करने वास्ते ग्रुप के अलावा अन्य प्रकार के ग्रुप पर यह राहत नहीं होगी। प्रार्थी के अधिवक्ता ने बहस करते हुए कहा कि वे अपना और परिवार का मेडिक्लेम बीमा पिछले चार दशक से स्वयं प्रीमियम भर कर करवाते आ रहे हैं और उनकी पॉलिसी सिर्फ नाम से ग्रुप मेडिक्लेम पॉलिसी है, जबकि वास्तव में यह व्यक्तिगत पारिवारिक मेडिक्लेम बीमा पॉलिसी है और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के जरिए ली जाने वाली बीमा का जो ग्रुप बनाया गया है,उसके आधार पर प्रार्थी जीएसटी छूट का हकदार है इसलिए एक अप्रैल से जारी होने वाली बीमा पॉलिसी प्रीमियम पर 18 फीसदी जीएसटी लगाया जाना गलत है। इस पर राजस्थान हाइकोर्ट की खंडपीठ ने भारत सरकार, केंद्रीय वित्त सचिव, जीएसटी काउंसिल, राज्य सरकार और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को नोटिस जारी किया है।