29 Jun 2026
नई दिल्ली, 29 जून (एजेंसी)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने जनकपुरी में तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म करने के आरोप में स्कूल के केयरटेकर को मिली जमानत को निरस्त कर दी है। जस्टिस विनोद कुमार की वेकेशन पीठ ने उसे एक जुलाई तक कोर्ट में सरेंडर करने का आदेश दिया है। निचली अदालत से मिली जमानत को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में दो याचिकाएं दायर की गई थीं। एक याचिका दिल्ली पुलिस ने और दूसरी रेप पीड़िता बच्ची की मां ने दायर की थी। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने आरोपित को जमानत देकर गलती की है। उन्होंने कहा कि ये मामला पॉक्सो एक्ट की धारा 6 का है, जिसमें कम से कम 20 साल की जेल का प्रावधान है। इस मामले में पीड़िता लड़की ने आरोपित की पहचान की है और इस घटना के बारे में बयान दिया है। सुनवाई के दौरान आरोपित के वकील ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि ये मामला तथ्यात्मक रुप से कहीं टिक ही नहीं पाएगा। ये घटना 30 अप्रैल की है। इस घटना को लेकर रेप पीड़िता लड़की की मां ने जनकपुरी थाने में एक मई को शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि आरोपित ने लड़की के साथ दाखिले के दूसरे दिन ही स्कूल टाइम में दुष्कर्म किया। स्कूल से लौटने पर लड़की ने दर्द की शिकायत की। जब मां ने पूछा तो उसने बताया कि आरोपित उसे स्कूल के सुनसान क्षेत्र में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस के मुताबिक लड़की ने आरोपित की पहचान की, जिसके बाद एक मई को ही आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया। 7 मई को द्वारका कोर्ट ने उसे जमानत दे दी। इस मामले में एक शिक्षक को भी गिरफ्तार किया गया था। शिक्षक पर आरोप है कि उसने प्रशासन से इस घटना की जानकारी छिपाई।