27 Feb 2026
नई दिल्ली, 27 फ़रवरी (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में लगे न्यायिक अधिकारियों को निर्वाचन आयोग की तरफ से ट्रेनिंग देने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि निर्वाचन आयोग प्रशिक्षण नहीं देगा तो कौन देगा। जो दस्तावेज एसआईआर के नोटिफिकेशन और हमारे आदेश में मान्य हैं, जज उन्हीं को स्वीकार करेंगे। आप व्यर्थ की आशंका मत जताइए। याचिका तृणमूल कांग्रेस ने दायर की थी। सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस की ओर से वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने कहा है कि डोमिसाइल सर्टिफिकेट मान्य नहीं होगा। तब जस्टिस बागची ने कहा कि अगर हमारे आदेश में होगा तो हम देखेंगे। उच्चतम न्यायालय ने 24 फरवरी को पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के एसआईआर में दावे और आपत्तियों का निपटारा करने के लिए राज्य के बाहर के न्यायिक अधिकारियों की तैनाती करने की अनुमति दे दी थी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ कलकत्ता उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस से कहा कि वे इस काम में तीन साल के अनुभव वाले एडिशनल सिविल जजों के अलावा झारखंड और ओडिशा से भी न्यायिक अधिकारियों की तैनाती करें। उच्चतम न्यायालय ने 20 फरवरी को ‘तार्किक विसंगति’ सूची में डाले गए लोगों की ओर से जमा किए दावों के निपटारे के लिए राज्य के न्यायिक अधिकारियों को तैनात करने का आदेश दिया था। उच्चतम न्यायालय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस से अनुरोध किया था कि वह सेवारत और रिटायर्ड एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज स्तर के न्यायिक अधिकारियों को एसआईआर प्रक्रिया के लिए उपलब्ध कराएं।