09 Jul 2026
नई दिल्ली, 09 जुलाई (एजेंसी)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) चित्रा रामकृष्णन की भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत लोक सेवक और लोक सेवा की परिभाषा को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस नवीन चावला की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि एनएसई लोकसेवा का कार्य करती है और चित्रा रामकृष्णन एनएसई की सीईओ और एमडी होने के नाते एनएसई की ओर से किए गए कार्य से खुद को अलग नहीं कर सकती हैं।
उच्च न्यायालय ने चित्रा रामकृष्णन के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए दी गई स्वीकृति के आदेश को चुनौती देने वाली दलील को भी खारिज कर दिया। सेबी के आरोपों के बाद चित्रा रामकृष्णन को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 6 मार्च, 2022 को गिरफ्तार किया था। चार्जशीट में सीबीआई ने कहा है कि चित्रा ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए महत्वपूर्ण फैसले किए। स्टॉक एक्सचेंज नियामक संस्था सेबी ने 11 फरवरी, 2022 को चित्रा रामकृष्णा और दूसरे आरोपितों के साथ आनंद सुब्रमण्यम की नियुक्ति में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया था। चित्रा ने पूछताछ में कहा था कि एक रहस्यमयी योगी ई-मेल के जरिये उन्हें फैसले लेने में मदद करते थे।
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर संजय पांडे और रवि नारायण के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मामला दर्ज किया था। इस मामले में सीबीआई ने अपनी जांच के दौरान संजय पांडे से जुड़ी एक फर्म आईसेक सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के परिसर से कुछ बिल की रसीदें, रिकॉर्डिंग के नमूने, रिकॉर्डिंग के मूल टेप और सर्वर के साथ-साथ दो लैपटॉप बरामद किए थे। संजय पांडे पर आरोप है कि उन्होंने 4 करोड़ 54 लाख रुपये लेकर चित्रा की मदद करने के लिए एमटीएनएल के फोन लाइन टेप किए थे।