03 Jun 2026
वाराणसी, 3 जून (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। वाराणसी में विकास परियोजनाओं और सड़क चौड़ीकरण कार्य के तहत प्रशासन द्वारा एक पुराने धार्मिक एवं ऐतिहासिक परिसर पर की गई ध्वस्तीकरण कार्रवाई को लेकर विवाद गहरा गया है। स्थानीय लोगों और संबंधित पक्षों का दावा है कि गिराया गया ढांचा लगभग 200 वर्ष पुराना था और उसका धार्मिक महत्व भी था। वहीं प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद की गई।
बताया जाता है कि शहर के पुराने क्षेत्र में स्थित वक्फ बोर्ड से जुड़े मुसाफिरखाना परिसर पर भारी पुलिस बल की मौजूदगी में रात के समय ध्वस्तीकरण अभियान चलाया गया। कार्रवाई के दौरान क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में रखा गया और आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई। प्रशासन का तर्क है कि यह कदम काशी विश्वनाथ धाम और आसपास के क्षेत्रों में आवागमन सुगम बनाने तथा पुनर्विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए उठाया गया।
घटना के बाद विभिन्न संगठनों और स्थानीय निवासियों ने परिसर की ऐतिहासिक विरासत को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। सोशल मीडिया पर भी कार्रवाई से जुड़े वीडियो और तस्वीरें वायरल हुईं, जिन पर अलग-अलग दावे किए गए। कुछ दावों को भ्रामक बताते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि कार्रवाई केवल चिन्हित संरचनाओं पर की गई और इसे कानूनी मंजूरी प्राप्त थी।
उल्लेखनीय है कि वाराणसी में पिछले कुछ वर्षों से काशी विश्वनाथ क्षेत्र और घाटों के आसपास व्यापक पुनर्विकास कार्य चल रहे हैं। इन परियोजनाओं के तहत कई पुराने भवनों और परिसरों का अधिग्रहण तथा ध्वस्तीकरण किया गया है, जिसको लेकर समय-समय पर विरासत संरक्षण और विकास के बीच संतुलन पर बहस होती रही है।
फिलहाल प्रशासन ने कानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य होने का दावा किया है, जबकि संबंधित पक्षों द्वारा मामले को लेकर आगे कानूनी और सामाजिक स्तर पर आवाज उठाने की बात कही जा रही है।