20 Mar 2026
नई दिल्ली, 20 मार्च (इंद्रप्रस्थ न्यूज|एजेंसी)। पश्चिम एशिया में जारी जंग भारतीय मुद्रा रुपये के लिए बड़ी परेशानी की वजह बनी हुई है। भारतीय मुद्रा आज डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गई। आज के कारोबार में भारतीय मुद्रा अमेरिकी डॉलर की तुलना में 1.13 की कमजोरी के साथ 93.76 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक आ गई। इसके बाद रुपये की स्थिति में मामूली सुधार भी हुआ, जिसके कारण भारतीय मुद्रा पांच पैसे की रिकवरी कर 1.08 रुपये की कमजोरी के साथ 93.71 रुपये प्रति डॉलर (अनंतिम) के स्तर पर बंद हुई। इसके पहले पिछले कारोबारी दिन गुरुवार को भारतीय मुद्रा 92.63 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुई थी। भारतीय मुद्रा रुपये में जनवरी 2025 के बाद आज पहली बार इतनी जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है। रुपये ने आज के कारोबार की शुरुआत भी गिरावट के साथ ही की थी। इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में भारतीय मुद्रा ने आज सुबह डॉलर के मुकाबले 25 पैसे की कमजोरी के साथ 92.88 रुपये के स्तर से कारोबार की शुरुआत की थी। आज का कारोबार शुरू होने के बाद रुपये की स्थिति लगातार गिरती चली गई। डॉलर की मांग में आई तेजी के कारण थोड़ी ही देर में भारतीय मुद्रा फिसल कर 93.28 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक आ गई। हालांकि, इस गिरावट के बाद रुपये की स्थिति में मामूली सुधार भी हुआ, जिससे भारतीय मुद्रा डॉलर की तुलना में 93.05 रुपये के स्तर तक आ गई। दिन के दूसरे सत्र में एक बार फिर डॉलर की मांग में तेज आ गई, जिसके कारण रुपये पर दबाव बढ़ने लगा। इस दबाव के कारण भारतीय मुद्रा लगातार नीचे गिरते हुए 93.76 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक चली गई। पूरे दिन के कारोबार के बाद डॉलर की तुलना में रुपये ने 1.08 रुपये की गिरावट के साथ 93.71 के स्तर पर आज के कारोबार का अंत किया। मुद्रा बाजार के आज के कारोबार में रुपया डॉलर के साथ ही ब्रिटिश पौंड (जीबीपी) और यूरो के मुकाबले भी कमजोर प्रदर्शन करता रहा। दिन भर के कारोबार के बाद ब्रिटिश पौंड (जीबीपी) की तुलना में रुपया 2.34 रुपये की कमजोरी के साथ 125.41 (अनंतिम) के स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह यूरो की तुलना में रुपया आज 1.32 रुपये की गिरावट के साथ 108.22 (अनंतिम) के स्तर पर पहुंच कर बंद हुआ। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि रुपये की कमजोरी के लिए पश्चिम एशिया में जारी जंग के साथ ही डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बड़ी वजह है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमला शुरू करने के बाद से ही विदेशी निवेशक भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट वाले देश से अपना पैसा सुरक्षित निकालने में जुटे हुए हैं। ऐसा होने से डॉलर की मांग लगातार बढ़ती जा रही है, वहीं रुपये पर दबाव भी काफी अधिक हो गया है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमत में आई जोरदार तेजी ने भी डॉलर की मांग बढ़ा दी है, जिससे रुपये पर नकारात्मक असर पड़ा है। फिनटेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के एक्जेक्यूटिव डायरेक्टर अनिल भंसाली का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी जंग के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी दबाव बढ़ गया है, जिसकी वजह से डॉलर की डिमांड में काफी तेजी आई है। ऐसा होने से अमेरिका के अलावा सभी दूसरे देशों की अपनी मुद्रा प्रभावित हो रही है। जंग के कारण कच्चे तेल की कीमत में तो तेजी आई ही है, मालवाहक जहाजों की आवाजाही का खर्च (ट्रांसपोर्टेशन चार्ज) भी बढ़ गया है। कीमत में बढ़ोतरी होने से डॉलर की मांग में भी तेजी आई है, जिसके कारण रुपया लगातार गिरता जा रहा है। इसी तरह खुराना सिक्योरिटीज एंड फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ रवि चंदर खुराना का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में जारी जंग लंबी खिंच गई, तो कच्चे तेल और गैस की कीमत आसमान छू सकती हैं। खासकर, कच्चे तेल की कीमत डेढ़ सौ डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर सकती है। ऐसा होने पर कच्चे तेल और गैस की अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए विदेशी बाजार पर निर्भर करने वाले भारत की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है। इसके साथ ही भारतीय मुद्रा भी ऐतिहासिक गिरावट का शिकार हो सकती है। इस संबंध में टीएनवी फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ तारकेश्वर नाथ वैष्णव का कहना है कि पश्चिम एशिया की जंग के बीच एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमले ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है। ऐसी स्थिति में दुनिया भर के निवेशक अपना पैसा सेफ हेवन एसेट्स में लगा रहे हैं। ऐसा करने के लिए ये निवेशक पूरी दुनिया में पहले से ही डॉलर के रूप में किए गए निवेश को निकालने में जुट गए हैं, जिससे डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है और डॉलर की मांग में तेजी आने से रुपये पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है।