20 Apr 2026
नई दिल्ली, 20 अप्रैल (हि.स.)। नोएडा के औद्योगिक इलाके में मजदूरों के आंदोलन को लेकर वकीलों के अखिल भारतीय संगठन ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन (एआईएलयू) की ओर से छात्र और नौजवान संगठनों के साथ मिलकर बनायी गई फैक्ट फाइंडिंग टीम ने अपनी रिपोर्ट जारी की है। फैक्ट फाइंडिंग टीम ने इस बात पर चिंता जताई है कि अभी तक गिरफ्तार किए गए लोगों बारे में आधिकारिक रुप से कुछ नहीं बताया गया है। घटना के चश्मदीदों के मुताबिक इस मामले में करीब आठ सौ लोगों के अलावा करीब साढ़े तीन सौ नाबालिगों को भी गिरफ्तार किया गया है। एआईएलयू के दिल्ली राज्य के सचिव सुनील कुमार के हस्ताक्षर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि 13 और 14 अप्रैल को सड़क पर खड़े कई निर्दोष लोगों को पुलिस ने उठा लिया। इनमें से कई बच्चे अपने ट्यूशन से लौट रहे थे, कुछ बाजार में सामान खरीद रहे थे, कुछ निर्माण मजदूरों को लंच करते समय तो कुछ वैसे पुरुषों और महिलाओं को भी गिरफ्तार किया गया था जो बाजार में दवाइयां और कपड़े खरीद रहे थे। इन्हें सादी वर्दी में पहुंचे पुलिसकर्मियों ने गिरफ्तार किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि फैक्टरियों में काम करने वाले कई मजदूरों को उनके कार्यस्थल से 15 और 17 अप्रैल के बीच गिरफ्तार किया गया। कई मजदूर ऐसे थे जो सुबह अपने काम पर पहुंचे तो उन्हें फैक्टरी या कार्यस्थल पर पहुंचने से पहले प्रबंधन के अधिकारियों के इशारे पर पुलिस ने गिरफ्तार किया। इनमें से कई मजदूर वैसे थे जिन्हें उनके प्रबंधकों ने कार्यस्थल पर बुलाया था। रिपोर्ट में इस बात पर चिंता जताई गई है कि जिन्हें गिरफ्तार किया गया उनके परिजनों को सूचना भी नहीं दी गई और गिरफ्तार करने के बाद उन्हें कहां ले जाया गया और रखा गया इसकी भी जानकारी नहीं दी गई। गिरफ्तारी की वजह भी नहीं बताई गई। रिपोर्ट के मुताबिक कई मजदूरों को अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के तहत गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार मजदूरों के परिजन अपने उनकी तलाश में थाने से लेकर कासना जेल की लगातार चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनका पता नहीं चल रहा है। कई मजदूरों को अभी तक नहीं छोड़ा गया है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि नोएडा पुलिस ने मजदूरों से निपटने में संवैधानिक प्रावधानों का भी उल्लंघन किया।