12 May 2026
-AIIMS के 51वें दीक्षांत समारोह में बोले उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन
-“कोई भी AI डॉक्टर की मरीज के पास मौजूदगी की जगह नहीं ले सकता”
नई दिल्ली, 12 मई (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोमवार को भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(AIIMS) के 51वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि AIIMS अब केवल अंतरराष्ट्रीय मानकों तक पहुंचने का प्रयास नहीं कर रहा, बल्कि स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा में नए वैश्विक मानक स्थापित कर रहा है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि AIIMS देश में चिकित्सा नवाचार और स्वास्थ्य सेवा उत्कृष्टता का प्रमुख केंद्र बन चुका है। उन्होंने कहा कि संस्थान आधुनिक चिकित्सा और मरीजों की देखभाल के सर्वोच्च मानकों को बनाए रखते हुए आम लोगों को सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। महामारी के दौरान मजबूती से काम करने से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में AIIMS ने अहम भूमिका निभाई है और आज “AIIMS ब्रांड” भारत ही नहीं, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया में भी भरोसे और ईमानदारी का प्रतीक बन गया है।
उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तथा AIIMS के अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, AIIMS के निदेशक प्रो. निखिल टंडन और संकाय सदस्यों की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान बड़ी संख्या में मरीजों का कुशलतापूर्वक प्रबंधन करते हुए भी शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि AIIMS ने दशकों से ऐसे डॉक्टर और शोधकर्ता तैयार किए हैं, जो चिकित्सा उत्कृष्टता के साथ नैतिकता और संवेदनशीलता का भी उदाहरण हैं।
उपराष्ट्रपति ने इस वर्ष अंटार्कटिका में AIIMS द्वारा किए गए रिमोट रोबोटिक अल्ट्रासाउंड का उल्लेख करते हुए कहा कि इस उपलब्धि ने साबित कर दिया है कि भारतीय चिकित्सा विशेषज्ञता के लिए अब भौगोलिक सीमाएं कोई बाधा नहीं हैं। उन्होंने AIIMS की अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों, विशेषकर इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर AI इन हेल्थ, की भी सराहना की।
उन्होंने कहा कि QS वर्ल्ड रैंकिंग में AIIMS ने केवल दो वर्षों में 40 स्थानों की छलांग लगाकर वैश्विक स्तर पर 105वां स्थान हासिल किया है। साथ ही संस्थान ने NIRF मेडिकल श्रेणी में 2018 से 2025 तक लगातार पहला स्थान बनाए रखा है। उन्होंने विश्वास जताया कि AIIMS जल्द ही दुनिया के शीर्ष 100 संस्थानों में शामिल होगा और भविष्य में विश्व का नंबर एक संस्थान बन सकता है।
उपराष्ट्रपति ने बताया कि AIIMS के संकाय सदस्यों को वर्षों में अनेक प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। इनमें 2 पद्म विभूषण, 15 पद्म भूषण और 51 पद्म श्री पुरस्कार शामिल हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान के 57 संकाय सदस्य स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में AIIMS संस्थानों के विस्तार की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इससे दूरदराज और पिछड़े क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत हुई हैं। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों की संख्या बढ़ाने के प्रयासों की भी प्रशंसा की।
दीक्षांत समारोह में स्नातक छात्रों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे ऐसे समय में चिकित्सा पेशे में प्रवेश कर रहे हैं, जब “वन नेशन, वन हेल्थ” की परिकल्पना देश में अधिक समावेशी और भविष्य उन्मुख स्वास्थ्य व्यवस्था को आकार दे रही है। उन्होंने युवा डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और स्वास्थ्यकर्मियों से करुणा, नवाचार और जनविश्वास को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) चिकित्सा सहित कई क्षेत्रों में बदलाव ला रही है, लेकिन कोई भी AI मरीज के बिस्तर के पास डॉक्टर की मानवीय उपस्थिति और संवेदनशीलता की जगह नहीं ले सकता। उन्होंने युवा चिकित्सकों से अपने पेशे में हमेशा संवेदनशीलता, ईमानदारी और मानवता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की।
इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा, AIIMS निदेशक प्रो. निखिल टंडन, डीन प्रो. राधिका टंडन, रजिस्ट्रार प्रो. गिरिजा प्रसाद रथ, संकाय सदस्य, स्वास्थ्यकर्मी, छात्र और अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।