05 Feb 2026
नई दिल्ली, 05 फरवरी (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने लद्दाख के कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर गुरुवार को सुनवाई टाल दी। जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 9 फरवरी को करने का आदेश दिया। उच्चतम न्यायालय ने 4 फरवरी को केंद्र सरकार से कहा था कि उसे सोनम वांगचुक की खराब होती जा रही तबीयत को ध्यान में रखते हुए उनकी हिरासत जारी रखने के फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील को इस संबंध में निर्देश लेकर कोर्ट को सूचित करने का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान जस्टिस पीबी वराले ने कहा था कि क्या केंद्र सरकार सोनम वांगचुक की हिरासत जारी रखने पर दोबारा विचार कर सकती है। जस्टिस वराले का समर्थन जस्टिस अरविंद कुमार ने भी किया था। जस्टिस अरविंद कुमार ने कहा था कि सोनम वांगचुक पांच महीनों से हिरासत में हैं। उनकी तबीयत लगातार खराब हो रही है। कुछ उम्र संबंधी बीमारियां भी हैं। ऐसे में सरकार को हिरासत जारी रखने पर दोबारा विचार करना चाहिए। तब केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) केएम नटराज ने कहा कि ये चिंता की बात है और वे इस पर निर्देश लेकर कोर्ट को सूचित करेंगे। दरअसल, सोनम वांगचुक की पत्नी अंजलि ने कहा था कि उन्हें एक विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेने की जरुरत है क्योंकि उन्हें बार-बार पेट में दर्द की शिकायत रहती है। तब कोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट तलब किया था। पहले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि सोनम वांगचुक के बयान राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने कहा था कि सोनम वांगचुक को जनमत संग्रह की मांग करके जहर फैलाने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। मेहता ने वांगचुक के बयानों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इलाके को ठप करने से रोकना जरुरी है। मेहता ने कहा था कि क्या वांगचुक चाहते हैं कि लद्दाख, नेपाल और बांग्लादेश बन जाए। मेहता ने कहा था कि वांगचुक युवाओं को आत्मदाह के लिए उसका रहे थे। ऐसे कामों की इजाजत नहीं दी जा सकती है। मेहता ने कहा था कि सोनम वांगचुक पाकिस्तान और चीन से घिरे इलाके में बैठकर कह रहे हैं कि भारतीय सेना कमजोर है। ये बयान काफी आपत्तिजनक हैं। सुनवाई के दौरान 8 जनवरी को वकील कपिल सिब्बल ने चौरी-चौरा कांड का जिक्र करते हुए कहा था कि हिंसा के बाद सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल तत्काल वापस ले लिया था। आपको याद होगा कि गांधीजी ने भी ऐसा ही किया था। जब चौरी-चौरा की घटना के बाद हिंसा हुई थी, तो उन्होंने भी बिल्कुल वैसा ही किया था। सिब्बल ने कहा कि हिरासत में लेने के 28 दिन बाद उनको हिरासत में लेने के आधार बताए गए जो कानूनी समय-सीमा का साफ उल्लंघन है। सिब्बल ने कहा कि कानून यह है कि जिन दस्तावेजों के आधार पर हिरासत में लिया गया है अगर आरोपित को उपलब्ध नहीं किया जाता है, तो हिरासत का आदेश रद्द हो जाता है। उच्चतम न्यायालय ने अपने कई फैसलों में यह बात कही है।