16 Mar 2026
नई दिल्ली, 16 मार्च (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि वो सामाजिक कार्यकर्ताओं के हालिया हिरासत से संबंधित स्पेशल सेल के परिसर के सीसीटीवी फुटेज संरक्षित रखे। जस्टिस नवीन चावला की अध्यक्षता वाली बेंच ने दिल्ली पुलिस से कहा कि आप क्या जांच कर रहे हैं ये हमें नहीं पता, लेकिन नियम-कायदों का पालन कीजिए। मामले की अगली सुनवाई 27 मार्च को होगी।
सुनवाई के दौरान साेमवार काे एक सामाजिक कार्यकर्ता रुद्र विक्रम के वकील जसदीप ढिल्लो ने कहा कि इस मामले में बाकी कार्यकर्ताओं को 14 मार्च को रिहा किया गया जबकि रुद्र को 15 मार्च की सुनवाई के बाद छोड़ा गया। ढिल्लो ने कहा कि रुद्र को हिरासत के दौरान प्रताड़ित किया गया। उसके हाथ, पैर, चेहरे और प्राइवेट पार्ट पर हमला किया गया। रुद्र का मेडिकल चेक अप कराने के लिए मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश देने की मांग की।
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कहा कि सभी कार्यकर्ताओं को पूछताछ के लिए बुलाया गया था लेकिन वे नहीं आए। तब कोर्ट ने कहा कि आपके पास अधिकार है। हम ये नहीं जानते कि आप क्या जांच कर रहे हैं, लेकिन आप जो भी करना चाहते हैं वे नियम-कायदों के मुताबिक करें। तब दिल्ली पुलिस ने कहा कि हम कोर्ट को आश्वासन देना चाहते हैं कि सब कुछ नियम-कायदों से ही होगा।
दिल्ली पुलिस ने 15 मार्च को कहा था कि अवैध हिरासत में रखे गए सामाजिक कार्यकर्ताओं को रिहा कर दिया गया है। तब कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर पूछा था कि उन्होंने किस आधार पर और किन परिस्थितियों में इन कार्यकर्ताओं को हिरासत में रखा। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के संबंधित इलाके का सीसीटीवी फुटेज को संरक्षित करने का आदेश दिया था। 15 मार्च को तीन कार्यकर्ताओं एहसानुल हक, राजबीर और सागरिका राजौरा की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं पर सुनवाई की थी।
वकील शाहरुख आलम ने 14 मार्च को चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मेंशन करते हुए इन याचिकाओं पर जल्द सुनवाई की मांग की थी। जिसके बाद कोर्ट ने 15 मार्च को सुनवाई करने का आदेश दिया था। सागरिका राजोरा ने अपनी बहन लक्षिता राजोरा को कोर्ट के समक्ष पेश करने की मांग की थी। याचिका में दावा किया गया था कि लक्षिता राजोरा 13 मार्च की शाम से दिल्ली यूनिवर्सिटी के पास विजय नगर इलाके से लापता थीं और उसका फोन भी बंद था। याचिका में कहा गया था कि वो विजय नगर इलाके में एक छात्र संगठन के दफ्तर गई। 13 मार्च के शाम आठ बजे के बाद से लक्षिता राजोरा का मोबाइल फोन बंद था।
याचिका में कहा गया था कि लक्षिता राजोरा छात्र संगठन के जिस दफ्तर में गई थी उस दफ्तर में मौजूद कई लोगों का शाम आठ बजे से कोई अता-पता नहीं है। याचिका में आशंका जताई गई थी कि लक्षिता राजोरा को दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने उठा लिया है। याचिका में कहा गया था कि करीब आठ महीने पहले लक्षिता राजोरा और उसके साथियों को अवैध रुप से हिरासत में रखा गया था। उस दौरान उन्हें करीब एक हफ्ते तक अवैध रुप से हिरासत में प्रताड़ित किया गया था और एक हफ्ते बाद मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश
किया गया था।