25 Aug 2026
आज देश एक अजीब स्थिति में है। विश्व बैंक, आईएमएफ, आरबीआई सब कह रहे हैं भारत दुनिया की सबसे तेज अर्थव्यवस्था है, पर साथ ही कह रहे हैं हमारी ग्रोथ 7.7% से घटकर 6.6% हो जाएगी। तेल 115 डॉलर, रुपया कमजोर, महंगाई 5% के पार। सवाल है कि इस मंदी जैसी धीमी ग्रोथ से कौन लड़ेगा? सरकार? आरबीआई? विदेशी निवेशक? मेरा स्पष्ट मानना है कि इस लड़ाई का असली सिपाही न सरकार है, न बाजार। असली सिपाही है स्वावलंबी श्रमिक और स्वदेशी आंदोलन। यही भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) की स्थापना से विचार है और यही आज की जरूरत है।
मंदी आती क्यों है? विदेशी निर्भरता से
आज की मंदी किसी एक कारण से नहीं आई। अमेरिका में टैरिफ वॉर, मिडिल ईस्ट में युद्ध, तेल महंगा। हम 88% तेल बाहर से लाते हैं, 80% इलेक्ट्रॉनिक सामान बाहर से। मतलब हमारी अर्थव्यवस्था की नब्ज बाहर के हाथ में है। जब बाहर छींक आती है, हमें बुखार आता है। इसका एक ही इलाज है- बाहर पर निर्भरता घटाओ। इसी को स्वदेशी कहते हैं। स्वदेशी का अर्थ विदेशी भगाओ नहीं है। स्वदेशी का अर्थ है- अपनी वस्तु के प्रति आग्रह। दत्तोपंत ठेंगड़ी जी ने हमें सिखाया था- स्वदेशी कोई आर्थिक नारा नहीं, राष्ट्र के स्वाभिमान का मंत्र है।
स्वदेशी कैसे मंदी रोकता है? एक सीधा गणित
आप 1000 रुपये की विदेशी शर्ट खरीदते हैं। इसमें से 700 रुपये डॉलर में बाहर चला जाता है, 300 रुपये दुकानदार को बचता है। नौकरी बाहर बनी।
वही 1000 रुपये की भारतीय शर्ट खरीदते हैं तो 1000 रुपया किसान से कपास, कताई मजदूर, बुनकर, दर्जी, दुकानदार में बंटता है। 5 परिवारों का चूल्हा जलता है। जीडीपी देश में बनती है।
आज सरकार इसलिए कह रही है- एक साल सोना खरीदना टालो, विदेश घूमना टालो। क्योंकि सोना और तेल में हमारा सबसे ज्यादा डॉलर बाहर जाता है। डॉलर बाहर जाएगा तो रुपया गिरेगा, रुपया गिरेगा तो तेल महंगा, तेल महंगा तो महंगाई बढ़ेगी और महंगाई की सबसे ज्यादा मार किस पर? श्रमिक पर। संगठित को डीए मिल जाता है, असंगठित, दिहाड़ी, गिग वर्कर को कौन देता है? इसलिए स्वदेशी खरीदना देशभक्ति के साथ-साथ आपके घर का बजट बचाना भी है।
Hot Money नहीं, Cold Money चाहिए जो स्वावलंबन से आएगा
रुपया क्यों गिर रहा है? क्योंकि शेयर मार्केट का Hot Money- विदेशी फंड आज पैसा लाया, कल युद्ध की खबर सुनकर भाग गया। इसे FPI कहते हैं। सरकार अब SBI के जरिए Indian Diaspora Bond लाने की सोच रही है। NRI से डॉलर में 5 साल के लिए उधार लेना। ये Cold Money है, टिकाऊ पैसा। भारत 1998, 2000, 2013 में भी यही कर चुका है। पर मैं पूछता हूं - बाहर के NRI से पहले क्या हम अपने घर के पैसों को स्वावलंबी बना सकते हैं? अगर दिल्ली का हर परिवार महीने का 1000 रुपया भी स्वदेशी सामान पर ज्यादा खर्च करे, विदेशी ब्रांड छोड़ दे तो एक साल में 12 हजार करोड़ रुपया दिल्ली में ही रहेगा। ये किसी डायसपोरा बॉन्ड से बड़ा बॉन्ड है। ये है- स्वदेशी बॉन्ड।
6.6% ग्रोथ में श्रमिक का क्या होगा? और स्वावलंबन उसका जवाब कैसे है?
7.7% ग्रोथ में 80 लाख नई नौकरी बनती है, 6.6% में 50 लाख। कंपनी परमानेंट भर्ती रोकेगी, ठेकेदारी बढ़ेगी। इन्क्रीमेंट 10% से 6% पर आएगा। ऐसे में श्रमिक के पास दो रास्ते हैं- नौकरी मांगते रहो या काम देने वाला बनो। भारतीय मजदूर संघ का नारा है- नौकरी मांगने वाला नहीं, काम देने वाला बनो। आज सरकार ने CGTMSE स्कीम की लिमिट 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ कर दी है। बिना मकान गिरवी रखे, सिर्फ हुनर पर लोन। अगर हमारा ITI पास साथी वेल्डिंग, EV बैटरी, AC रिपेयर, दो सिलाई मशीन का काम शुरू कर दे तो वो खुद 2 लोगों को रोजगार देगा। यही स्वावलंबन है। ECLGS कोरोना की इमरजेंसी दवा थी, CGTMSE रोज की विटामिन है।
आम नागरिक की पांच जिम्मेदारी- भारतीय मजदूर संघ का आह्वान
मैं दिल्ली प्रदेश के सभी कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से 5 आह्वान करता हूं:
1. स्वदेशी अपनाओ: इस दिवाली विदेशी झालर नहीं, कुम्हार की दीये, जूता-चप्पल, कपड़ा भारतीय लो।
2. बचत को संस्कार बनाओ: 6 महीने का खर्च Emergency Fund के रूप में बचाओ। e-Shram, EPFO, ESI अपडेट रखो। यही मंदी में साहूकार से बचाएगा।
3. हुनर सीखो: डिग्री से ज्यादा स्किल की कीमत है। Skill India में फ्री कोर्स हैं। एक सर्टिफिकेट आपकी दिहाड़ी 500 से 1000 कर सकता है।
4. अफवाह से बचो: WhatsApp पर बैंक डूब गया सुनकर पैसा मत निकालो। भारत 2013, 2020 से भी निकला है। हमारा घरेलू बाजार 140 करोड़ का है, यही ताकत है।
5. श्रम का सम्मान करो: अपने घर में काम करने वाले, ऑटो वाले, प्लंबर को समय पर पैसा दो, इज्जत दो। उसकी खरीदने की ताकत ही देश की GDP है।
डायसपोरा बॉन्ड सरकार लाएगी, RBI ब्याज संभालेगा, BHAVYA पार्क बनेंगे। पर देश तब बचेगा जब नागरिक स्वावलंबी बनेगा। मंदी बाहर के युद्ध से आई है, पर जीती अंदर से जाएगी। इतिहास गवाह है- जो समाज बचत, हुनर और स्वदेशी पर टिका है, वही मंदी के बाद सबसे तेज दौड़ता है। आइए, इस 6.6% की परीक्षा को हम संकट नहीं, अवसर बनाएं- स्वावलंबी भारत, स्वदेशी भारत के संकल्प के साथ।
(लेखक, भारतीय मजदूर संघ, दिल्ली प्रदेश के महामंत्री हैं।)