16 Jul 2026
प्रयागराज, 16 जुलाई (एजेंसी)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गुरुवार को एक नाबालिग बच्ची की अवैध हिरासत से जुड़े बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका मामले में सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को बच्ची को 30 जुलाई 2026 को अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकलपीठ ने की।
याची संदीप कुशवाहा की ओर से उनके अधिवक्ताओं ने अदालत में बताया कि उनकी 15 वर्षीय नाबालिग बेटी धर्मनिष्ठा फिलहाल विपक्षी 4 से 10 की अवैध निरूद्धि में है। याचिका के अनुसार, प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, कानपुर देहात ने 6 जनवरी 2026 को संदीप कुमार कुशवाहा बनाम स्मृति अंजु देवी केस में नाबालिग बच्चों की अभिरक्षा कानूनी रूप से याचिकाकर्ता को सौंपी थी।
आरोप है कि इस आदेश के बावजूद 23 जून 2026 को विपक्षियों ने बच्ची को याचिकाकर्ता की वैध अभिरक्षा से जबरन ले लिया। इसके बाद 26 जून 2026 को थाना देरापुर, जिला कानपुर देहात में लिखित शिकायत भी दर्ज कराई गई, लेकिन पुलिस ने अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
वहीं राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त शासकीय अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि बच्ची अपनी सहमति से अपनी सगी माँ के पास रह रही है।
अदालत ने कहा कि कानपुर देहात परिवार न्यायालय का 6 जनवरी 2026 का आदेश अभी तक किसी सक्षम अदालत द्वारा रद्द, स्थगित या संशोधित नहीं किया गया है, इसलिए वह अभी भी प्रभावी है। कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता की वैध अभिरक्षा से बच्ची को कानून की प्रक्रिया के बिना हटाया जाना एक गंभीर मुद्दा है, जिसकी जांच जरूरी है।
हालांकि, राज्य सरकार के इस बयान को देखते हुए कि बच्ची स्वेच्छा से अपनी माँ के पास रह रही है, अदालत ने आगे कोई आदेश पारित करने से पहले बच्ची से व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर वास्तविक स्थिति जानना उचित समझा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चों से जुड़े अभिरक्षा मामलों में बच्चे का कल्याण ही सर्वोपरि होता है।
कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि वे नाबालिग धर्मनिष्ठा को 30 जुलाई 2026 को कोर्ट में पेश करें। प्रतिवादी बच्ची की मां को नोटिस जारी करने का आदेश दिया गया। कोर्ट ने कहा यदि बच्ची को तय तारीख पर पेश नहीं किया गया, तो संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह बताना होगा कि उन्होंने बच्ची को पेश कराने के लिए क्या ठोस प्रयास किए। मामले की अगली सुनवाई अब 30 जुलाई 2026 को होगी।