23 Sep 2026
नई दिल्ली, 23 सितंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। सतत अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में उल्लेखनीय योगदान के लिए नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) के अध्यक्ष मनोज कुमार द्विवेदी ने बुधवार को सात स्वच्छता कर्मियों को सम्मानित किया। इन कर्मियों ने गीले तथा बागवानी/हरित कचरे के प्रसंस्करण से जैविक कम्पोस्ट तैयार करने, उसकी छनाई और पैकेजिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
पालिका केंद्र स्थित परिषद कक्ष में आयोजित कार्यक्रम में स्वच्छता कर्मियों के योगदान की सराहना करते हुए द्विवेदी ने कहा कि पिछले एक वर्ष में चाणक्यपुरी स्थित मधु लिमये मार्ग के जैविक कम्पोस्ट संयंत्र में करीब 13,000 किलोग्राम जैविक कम्पोस्ट तैयार किया गया है। यह कम्पोस्ट पूरी तरह एनडीएमसी क्षेत्र से प्राप्त गीले और बागवानी/हरित कचरे से तैयार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि का श्रेय फील्ड में काम करने वाले स्वच्छता कर्मियों की मेहनत, प्रतिबद्धता और कार्यकुशलता को जाता है। जैव-अवक्रमणीय कचरे से कम्पोस्ट तैयार करना इस बात का उदाहरण है कि जिसे सामान्य तौर पर कचरा माना जाता है, उसे उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है।
एनडीएमसी अध्यक्ष ने कहा कि परिषद ‘वेस्ट टू वेल्थ’ और ‘वेस्ट टू ग्रीनरी’ की अवधारणा को बढ़ावा दे रही है। कम्पोस्टिंग परिषद के ‘जीरो वेस्ट टू लैंडफिल’ दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि एनडीएमसी की रणनीति स्रोत पर कचरे का पृथक्करण, विकेंद्रीकृत प्रसंस्करण और अधिकतम संसाधन पुनर्प्राप्ति पर केंद्रित है।
द्विवेदी ने कहा कि गीले और बागवानी कचरे को उचित तरीके से अलग कर वैज्ञानिक ढंग से प्रसंस्कृत किया जाए तो इससे जैविक खाद तैयार की जा सकती है। एनडीएमसी इस कचरे के संग्रहण और प्रसंस्करण से लेकर कम्पोस्ट के उत्पादन तथा उसके हरित क्षेत्रों और लैंडस्केपिंग में उपयोग तक एक चक्रीय व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि विकेंद्रीकृत स्तर पर जैव-अवक्रमणीय कचरे के प्रसंस्करण से उसे लंबी दूरी तक लैंडफिल या केंद्रीकृत प्रसंस्करण केंद्रों तक ले जाने की जरूरत कम होती है। इससे परिवहन, उत्सर्जन और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर संसाधनों की पुनर्प्राप्ति को बढ़ावा मिलता है।
एनडीएमसी अध्यक्ष ने अनुपम कॉलोनी में अपनाए गए इस मॉडल को परिषद क्षेत्र के अन्य स्थानों पर भी दोहराने और इसका विस्तार करने पर जोर दिया। उन्होंने नागरिकों से भी गीले, सूखे, सैनिटरी तथा घरेलू खतरनाक कचरे को स्रोत पर अलग-अलग रखने की अपील की, ताकि अपशिष्ट प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि ऐसे विकेंद्रीकृत मॉडल नई दिल्ली को स्वच्छ, हरित और अधिक टिकाऊ बनाने के प्रयासों को मजबूती प्रदान कर सकते हैं।