25 Sep 2026
नई दिल्ली, 24 सितंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। राष्ट्रीय नागरिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्ण कुमार गौतम ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को ज्ञापन भेजकर वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव बायोमीट्रिक पहचान आधारित मतदान प्रणाली से कराने की मांग की है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से मतदान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाने के लिए आधुनिक डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में कदम उठाने का आग्रह किया है।
गौतम ने कहा कि भारत एक बड़ा लोकतांत्रिक गणराज्य है और संविधान ने स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव की व्यवस्था सुनिश्चित की है। उनके मुताबिक निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है कि वह निर्धारित समय पर चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से संपन्न कराए, चाहे वह लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा चुनाव।
राष्ट्रीय नागरिक पार्टी अध्यक्ष ने कहा कि देश में पहले बैलेट पेपर के माध्यम से चुनाव होते थे, जिसके बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का इस्तेमाल शुरू हुआ। उनके अनुसार ईवीएम के प्रयोग से मतगणना में समय की बचत हुई और अमान्य मतों की समस्या को कम करने में मदद मिली। उन्होंने कहा कि ईवीएम को लेकर उठने वाले सवालों के बीच वीवीपैट व्यवस्था भी विकसित की गई, जिससे मतदाता अपने मत की पुष्टि कर सकता है।
गौतम ने सवाल उठाया कि जब देश में आधार, डिजिटल तकनीक, बायोमीट्रिक पहचान, इंटरनेट कनेक्टिविटी और प्रशासनिक तकनीक का व्यापक विस्तार हो चुका है, तो निर्वाचन आयोग मतदान प्रक्रिया में बायोमीट्रिक पहचान आधारित प्रणाली विकसित करने की दिशा में आगे क्यों नहीं बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि बायोमीट्रिक मतदान प्रणाली में अंगुलियों के निशान, आइरिस स्कैन अथवा चेहरे की पहचान जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। उनके अनुसार ऐसी व्यवस्था से फर्जी, मृत अथवा काल्पनिक मतदाताओं के नाम पर मतदान सहित चुनाव से जुड़ी कुछ अनियमितताओं पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।
गौतम ने मांग की कि 2027 के उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब विधानसभा चुनावों में बायोमीट्रिक पहचान आधारित मतदान प्रणाली को लागू करने की दिशा में निर्वाचन आयोग आवश्यक तैयारी करे। उन्होंने कहा कि इससे चुनाव प्रक्रिया में जनता का विश्वास और मजबूत किया जा सकेगा।
राष्ट्रीय नागरिक पार्टी अध्यक्ष ने यह भी कहा कि बायोमीट्रिक और डिजिटल चुनावी व्यवस्था के माध्यम से महिला, पुरुष और किन्नर समुदाय से जुड़े मतदाताओं के आंकड़ों का अधिक व्यवस्थित तरीके से संकलन और प्रबंधन संभव हो सकता है। उन्होंने संबंधित समुदायों को उनके अधिकार और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए उचित व्यवस्था किए जाने की भी मांग की।